तमिलनाडु में थलपति विजय का बड़ा एक्शन, एमके स्टालिन सरकार का फैसला पलटा, मंदिरों के फंड से बनने वाले 46 कमर्शियल प्रोजेक्ट्स किए रद्द

डिजिटल डेस्क- तमिलनाडु के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री और तमिलगा वेत्री कझगम के प्रमुख थलपति विजय ने सत्ता संभालते ही एक ऐसा ऐतिहासिक और बड़ा फैसला लिया है, जिसकी चौतरफा तारीफ हो रही है। सीएम विजय ने पूर्ववर्ती एमके स्टालिन सरकार के उस विवादित फैसले को पूरी तरह पलट दिया है, जिसके तहत मंदिरों के फंड का इस्तेमाल गैर-धार्मिक और व्यावसायिक प्रोजेक्ट्स के लिए किया जाना था। टीवीके सरकार ने साफ शब्दों में कहा है कि मंदिरों की सभी चल और अचल संपत्तियों का इस्तेमाल केवल और केवल उनके पवित्र व धार्मिक कार्यों के लिए ही किया जाएगा, जिससे मंदिरों को दिवालिया होने से बचाया जा सके।

246 करोड़ के शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और मैरिज हॉल पर लगी रोक

मुख्यमंत्री थलपति विजय की हरी झंडी मिलने के बाद शुक्रवार देर रात इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिया गया। पिछली डीएमके सरकार (2021-2026) ने मंदिरों के राजस्व और फंड का उपयोग करके लगभग 246 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से 29 मैरिज हॉल और 17 कमर्शियल शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बनाने की मंजूरी दी थी। जारी किए गए नए सरकारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि चूंकि इन 46 प्रोजेक्ट्स पर अभी काम शुरू नहीं हुआ था और मंदिरों की मौजूदा आर्थिक स्थिति को देखते हुए इनकी मंजूरी को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाता है। हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग (HR&CE) में संरचनात्मक सुधारों की दिशा में विजय सरकार का यह पहला और सबसे मजबूत कदम माना जा रहा है।

हिंदू संगठनों और दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर

लंबे समय से तमिलनाडु के विभिन्न हिंदू संगठन, दक्षिणपंथी कार्यकर्ता और एआईएडीएमके (AIADMK) के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी जैसे नेता मंदिरों के पैसे को व्यावसायिक कामों में खर्च करने पर लगातार सवाल उठा रहे थे। संगठनों का तर्क था कि भक्तों द्वारा दिया गया दान सिर्फ मंदिर के रखरखाव और धार्मिक कार्यों में लगना चाहिए। सीएम विजय के इस फैसले ने इन सभी संगठनों को बेहद खुश कर दिया है। सोशल मीडिया पर लोग इसे ‘सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहरों के संरक्षण’ की दिशा में एक साहसिक शुरुआत बता रहे हैं।

राज्यपाल के वादे के ठीक दो दिन बाद आया ऐतिहासिक आदेश

यह फैसला इसलिए भी बेहद अहम है क्योंकि दो दिन पहले ही तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने विधानसभा में अपने पारंपरिक संबोधन के दौरान प्राचीन मंदिरों के प्रशासन को बेहतर बनाने के लिए संरचनात्मक सुधारों का वादा किया था। राज्यपाल ने सदन में कहा था कि नई सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि मंदिरों की संपत्तियां सिर्फ उनके मूल पवित्र उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल हों। राज्यपाल के इस बयान के महज 48 घंटे के भीतर मुख्यमंत्री विजय ने आदेश जारी कर अपनी राजनीतिक इच्छाशक्ति का लोहा मनवा दिया है।

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