यूपी में अब फटाफट मिलेगा इंसाफ! 900 नई अदालतों को मंजूरी, 1.20 करोड़ लंबित मामलों पर बड़ा एक्शन

knews desk – उत्तर प्रदेश की अदालतों में लंबित मुकदमों की संख्या लगातार न्यायिक व्यवस्था के सामने चुनौती बनी हुई है. इसी समस्या को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में 15 सितंबर को हुई कैबिनेट बैठक में 900 नई अदालतों की स्थापना का फैसला लिया गया. वित्त मंत्री सुरेश खन्ना के अनुसार, यह इलाहाबाद हाईकोर्ट की जरूरत के आकलन के आधार पर चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है.

1.20 करोड़ से ज्यादा मुकदमे लंबित

सरकार के मुताबिक, प्रदेश के 75 जिलों में 1,20,66,105 मुकदमे लंबित हैं. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने न्यायिक व्यवस्था की जरूरत का आकलन करते हुए कुल 9,149 अतिरिक्त अदालतों की आवश्यकता बताई है. पहले चरण में 900 अदालतों की मंजूरी इसी प्रक्रिया का हिस्सा है.

अदालतों की संख्या बढ़ाने का उद्देश्य मामलों की सुनवाई के लिए उपलब्ध क्षमता को बढ़ाना है. हालांकि, लंबित मुकदमों में कमी कितनी तेजी से आएगी, यह अदालतों के संचालन, न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति और अन्य जरूरी संसाधनों की उपलब्धता पर निर्भर करेगा.

किस तरह की 900 अदालतें बनेंगी?

नई अदालतों का गठन तीन श्रेणियों में किया जाएगा:

अदालत का प्रकारसंख्या
अपर जिला एवं सत्र न्यायालय (ADJ/HJS)237
सिविल जज (सीनियर डिवीजन)391
सिविल जज (जूनियर डिवीजन)272
कुल900

इन अदालतों का आवंटन जिलों में लंबित मुकदमों की संख्या के आधार पर किया जाएगा. यानी सभी जिलों को समान संख्या में अदालतें नहीं मिलेंगी.

9,084 पदों के सृजन को मंजूरी

900 नई अदालतों के संचालन के लिए कुल 9,084 पदों को मंजूरी दी गई है. इनमें 6,656 नियमित और 2,428 आउटसोर्स पद शामिल हैं. इन पदों पर न्यायिक अधिकारियों के अलावा स्टेनोग्राफर, रीडर, मुंसरिम, वरिष्ठ सहायक और कनिष्ठ सहायक जैसे कर्मचारी शामिल होंगे.

यह फैसला कानून की पढ़ाई कर चुके युवाओं और न्यायिक व्यवस्था से जुड़े अन्य अभ्यर्थियों के लिए रोजगार के अवसर पैदा कर सकता है. हालांकि, नई भर्तियों की प्रक्रिया तुरंत शुरू होगी या नहीं, यह अलग-अलग पदों की रिक्तियों और नियुक्ति संबंधी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा.

भर्ती कब शुरू होगी?

सरकार के प्रस्ताव के अनुसार, नए पदों पर भर्ती की प्रक्रिया मौजूदा स्वीकृत रिक्तियों को भरने और जिला स्तर पर जरूरी आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध होने के बाद शुरू की जाएगी. इसलिए पदों की मंजूरी को तत्काल भर्ती नोटिफिकेशन जारी होने के बराबर नहीं माना जा सकता.

सरकार पर कितना आएगा खर्च?

नई अदालतों और उनसे जुड़े पदों के संचालन पर राज्य सरकार को हर साल करीब 693.60 करोड़ रुपये का खर्च आएगा. इसके अलावा शुरुआती जरूरतों के लिए करीब 8.72 करोड़ रुपये का अनावर्ती व्यय स्वीकृत किया गया है. इस राशि में अदालतों के भवन और अन्य आधारभूत संरचनाओं का खर्च शामिल नहीं है.

आम लोगों को क्या फायदा होगा?

नई अदालतों के गठन से न्यायिक व्यवस्था में मामलों की सुनवाई की क्षमता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है. इससे लंबित मुकदमों के निस्तारण में मदद मिल सकती है और अदालतों पर काम का दबाव कम हो सकता है.

हालांकि, सिर्फ अदालतों की संख्या बढ़ाने से सभी मुकदमों का जल्द निपटारा सुनिश्चित नहीं होता. इसके लिए पर्याप्त न्यायिक अधिकारी, कर्मचारी, कोर्ट रूम, रिकॉर्ड व्यवस्था और अन्य संसाधनों की जरूरत होगी.

आगे क्या होगा?

900 अदालतों का गठन कुल 9,149 अतिरिक्त अदालतों की जरूरत के आकलन का पहला चरण है. अब आगे की प्रक्रिया में अदालतों का जिला-वार आवंटन, जरूरी आधारभूत सुविधाओं की तैयारी और नियुक्तियों से जुड़े कदम शामिल होंगे. सरकार के इस फैसले का वास्तविक असर इन प्रक्रियाओं के पूरा होने और नई अदालतों के प्रभावी संचालन के बाद ही स्पष्ट होगा.

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