Knews Desk– मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली में हुए विरोध-प्रदर्शनों और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। अदालत ने एक ओर प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई, मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध और इंटरनेट सेवाएं बंद किए जाने से जुड़ी अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई की, वहीं दूसरी ओर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत INDIA ब्लॉक के नेताओं की याचिका पर चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों को नोटिस जारी किया।विपक्ष की संयुक्त याचिका में चुनाव आयोग के फैसलों, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और मतदाता सूची से कथित तौर पर बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा आयोग की सामूहिक शक्तियों के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिका पर फैसला सुनाने से पहले याचिकाकर्ताओं में से एक को अपने आचरण के बारे में स्पष्टीकरण देना होगा। हालांकि, अदालत ने यह स्पष्ट नहीं किया कि 13 याचिकाकर्ताओं में से किसके आचरण पर उसे आपत्ति है। सुनवाई के दौरान राहुल गांधी को समर्थकों के साथ सुप्रीम कोर्ट आने को लेकर भी स्पष्टीकरण देने को कहा गया।
दिल्ली में 10 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन के दौरान लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने अदालत में अपने जवाब दाखिल किए। अवमानना याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि सुप्रीम कोर्ट के पहले के निर्देशों के बावजूद लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाए गए, प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया और मेट्रो सेवाओं तथा इंटरनेट पर पाबंदियां लगाई गईं।सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि सरकार ने अपना जवाब दाखिल कर दिया है और बिना शर्त माफी भी मांगी है। इस पर जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि अदालत को हलफनामे देर से मिले हैं और शुरुआत में केवल DMRC का हलफनामा प्राप्त हुआ था। माफी के मुद्दे पर उन्होंने टिप्पणी की कि सॉलिसिटर जनरल की दलीलों से यह सशर्त माफी जैसी प्रतीत हो रही है।
अवमानना याचिकाओं में पुलिस की कथित बर्बरता, प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने, मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और इंटरनेट सेवाएं बाधित करने के आरोप भी लगाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इन कदमों से लोगों की आवाजाही और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार पर असर पड़ा। वहीं, केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस ने दलील दी है कि प्रतिबंध संभावित कानून-व्यवस्था की समस्या रोकने और सार्वजनिक शांति बनाए रखने के लिए लगाए गए थे।सुप्रीम कोर्ट ने विरोध-प्रदर्शन से संबंधित घटनाओं के सभी सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने और उन्हें अदालत में पेश करने का निर्देश भी दिया। इसके अलावा, जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन की जगह के रूप में डीनोटिफाई करने के मामले में केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया गया है। अब इन मामलों में संबंधित पक्षों के जवाब और अदालत की आगे की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी।