Knews Desk – दिल्ली के सत्य निकेतन में PG की इमारत गिरने और सात लोगों की मौत के बाद मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। हादसे के बाद राजधानी में PG और निजी हॉस्टलों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी और वरिष्ठ वकील अजीत कुमार सिन्हा ने मामले में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की है। रिपोर्ट में दिल्ली के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के आसपास चल रहे सभी PG और निजी हॉस्टलों का तत्काल और समयबद्ध सुरक्षा ऑडिट कराने की सिफारिश की गई है।
बताया गया है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर दोपहर 2 बजे सुनवाई कर सकता है। एमिकस क्यूरी की ओर से भी मामले की जल्द सुनवाई की मांग किए जाने की संभावना है। रिपोर्ट के मुताबिक, 6 सितंबर को दोपहर करीब 1:30 बजे सत्य निकेतन के P-14 में एक इमारत ढह गई थी। इमारत में बेसमेंट के अलावा चार मंजिलें थीं और इसे छात्रों के लिए ‘Hostel Daze’ नाम से बॉयज PG के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। हादसे के बाद बचाव दल ने 12 लोगों को बाहर निकाला, जिनमें सात लोगों की मौत हो गई।
एमिकस क्यूरी ने अपनी रिपोर्ट में सत्य निकेतन में पहले हुई ऐसी घटनाओं का भी जिक्र किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल 2022 में भी इलाके में एक इमारत गिर गई थी। उस हादसे में दो लोगों की मौत हुई थी, जबकि चार लोग घायल हुए थे। दोबारा इसी तरह की घटना होने के बाद इमारतों की नियमित जांच और भवन नियमों के पालन को लेकर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि सत्य निकेतन दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के नजदीक स्थित होने के कारण छात्रों के रहने का बड़ा केंद्र बन चुका है। यहां बड़ी संख्या में PG, निजी हॉस्टल, मेस, दुकानें और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां चलती हैं। ऐसे में इन भवनों की सुरक्षा की नियमित निगरानी बेहद जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल रिपोर्ट में कॉलेज और विश्वविद्यालयों के आसपास मौजूद सभी PG, निजी हॉस्टल और छात्र आवासों का समयबद्ध सुरक्षा ऑडिट और निरीक्षण कराने की जरूरत बताई गई है। इसमें भवन का नक्शा, निर्माण की स्थिति, बेसमेंट, जमीन के इस्तेमाल, इमारत की मजबूती, अग्नि सुरक्षा और आपातकालीन निकासी के रास्तों की जांच शामिल करने की सिफारिश की गई है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि खतरनाक इमारतों की पहचान कर समय रहते जरूरी कार्रवाई की जानी चाहिए। इसके अलावा भवन निर्माण और सुरक्षा से जुड़े नियमों को प्रभावी तरीके से लागू करने की व्यवस्था सुनिश्चित करना जरूरी है। सत्य निकेतन हादसे ने राजधानी में छात्र आवासों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और अदालत की ओर से दिए जाने वाले संभावित निर्देशों पर है।