KNEWS DESK- पंजाब बीजेपी में संगठनात्मक फेरबदल के बाद अंदरूनी असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। जिला अध्यक्षों की नियुक्तियों और संगठन में किए गए बदलावों से नाराज कई पुराने नेताओं और पदाधिकारियों ने सामूहिक इस्तीफे दे दिए हैं। लगातार बढ़ते विरोध के बाद पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा है। प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों को दिल्ली तलब कर संगठन में बढ़ रहे असंतोष को जल्द से जल्द खत्म करने के निर्देश दिए गए हैं।
दरअसल, केवल सिंह ढिल्लों ने पंजाब बीजेपी की नई संगठनात्मक टीम का ऐलान किया था। इसके बाद कई जिलों में पार्टी के पुराने नेताओं और पदाधिकारियों में नाराजगी बढ़ गई। कुछ जगहों पर तो संगठन की पूरी टीम ने ही इस्तीफा दे दिया। इनमें बीजेपी के कई ऐसे पुराने और टकसाली नेता भी शामिल हैं, जो लंबे समय से पार्टी के साथ जुड़े हुए हैं।
पुराने नेताओं की अनदेखी का आरोप
पार्टी के नाराज नेताओं का आरोप है कि संगठन में नियुक्तियों के दौरान पुराने बीजेपी कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी की जा रही है। उनका कहना है कि कांग्रेस और दूसरी पार्टियों से बीजेपी में शामिल हुए नए नेताओं को संगठन में ज्यादा तवज्जो दी जा रही है। नाराजगी की एक बड़ी वजह यह भी बताई जा रही है कि कांग्रेस से बीजेपी में आए केवल सिंह ढिल्लों को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बाद संगठनात्मक नियुक्तियों में भी नए चेहरों को प्राथमिकता मिली। इससे पुराने नेताओं के बीच असंतोष बढ़ा है।
पार्टी के सामने होशियारपुर, लुधियाना, फरीदकोट, खन्ना, मुक्तसर और संगरूर जैसे जिलों में विरोध को शांत करना बड़ी चुनौती बन गया है। केंद्रीय नेतृत्व अब इस्तीफा देने वाले नेताओं को दोबारा संगठन से जोड़ने और वरिष्ठ नेताओं को विश्वास में लेने की कोशिश कर रहा है।
होशियारपुर में 111 नेताओं के इस्तीफे
सबसे ज्यादा विरोध होशियारपुर में देखने को मिला है। यहां जिला अध्यक्ष पद पर बदलाव के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता तीक्ष्ण सूद ने अपने सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया। उनके समर्थन में जिले के 111 पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने भी सामूहिक इस्तीफे सौंप दिए। इनमें मंडल अध्यक्ष, जिला सचिव और विभिन्न मोर्चों के पदाधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं। होशियारपुर में जिला अध्यक्ष पद पर किए गए बदलाव को लेकर पुराने नेताओं में नाराजगी है। सतीश बावा को हटाकर नितिन गुप्ता ‘नन्नू’ को जिला अध्यक्ष बनाए जाने के बाद विरोध तेज हुआ।
फरीदकोट में भी जिला अध्यक्ष बदले जाने के बाद असंतोष सामने आया। यहां मंडल अध्यक्ष समेत करीब 10 वरिष्ठ पदाधिकारियों ने संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया। इसके अलावा लुधियाना, खन्ना और संगरूर में भी संगठनात्मक बदलाव को लेकर विरोध की खबरें सामने आई हैं।
दो हफ्ते में 6 जिला अध्यक्ष बदले
बीजेपी के अंदर बढ़ते असंतोष की एक वजह संगठन में तेजी से किए गए बदलाव को भी माना जा रहा है। महज दो सप्ताह के भीतर छह जिला अध्यक्षों को बदलने के फैसले के बाद पार्टी के पुराने नेताओं के बीच सवाल उठने लगे। वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि भविष्य में संगठनात्मक नियुक्तियों से पहले उनसे व्यापक सलाह-मशविरा किया जाना चाहिए। केंद्रीय नेतृत्व भी अब नाराज नेताओं को भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहा है कि पार्टी में उनकी भूमिका और सम्मान बरकरार रहेगा।
तीक्ष्ण सूद, सुखमिंदर ग्रेवाल और मनिंदर सिंह जैसे वरिष्ठ नेताओं के इस्तीफों ने प्रदेश नेतृत्व पर दबाव बढ़ा दिया है। पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती पुराने और टकसाली नेताओं की नाराजगी को दूर करना है।
दिल्ली में तलब किए गए ढिल्लों
मामला बढ़ता देख बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों को दिल्ली बुलाया। सूत्रों के मुताबिक, उन्हें संगठन में बढ़ रहे असंतोष को जल्द नियंत्रित करने और नाराज नेताओं से संवाद बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। नेतृत्व नहीं चाहता कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब बीजेपी में यह विवाद बड़ा संगठनात्मक संकट बन जाए।
दिल्ली से लौटने के बाद ढिल्लों ने कहा कि पार्टी एक परिवार की तरह है और अंदरूनी मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझा लिया जाएगा। उन्होंने नाराज नेताओं को पूरा सम्मान देने का भरोसा भी दिलाया।
सभी 117 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी
केवल सिंह ढिल्लों ने दावा किया कि बीजेपी अब पंजाब में पहले की तरह कुछ चुनिंदा सीटों तक सीमित नहीं रहेगी। पार्टी राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं का मनोबल मजबूत है और संगठन के भीतर जो भी मतभेद हैं, उन्हें जल्द दूर कर लिया जाएगा।
फिलहाल पंजाब बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती सामूहिक इस्तीफों के बाद पुराने नेताओं को फिर से संगठन के साथ जोड़ना है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर डैमेज कंट्रोल में जुट गई है। अब देखना होगा कि बीजेपी नाराज नेताओं को मनाने में कितनी सफल होती है और संगठनात्मक फेरबदल से पैदा हुआ यह विवाद कितनी जल्दी खत्म होता है।