डिजिटल डेस्क- अयोध्या स्थित भव्य श्री राम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले दान पात्रों (चढ़ावे की राशि) से जुड़े कथित विवाद और सोशल मीडिया पर उड़ रही अफवाहों के बीच एक बेहद बड़ी खबर सामने आई है। इस संवेदनशील मामले पर अब तक मौन रहे ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ ने बड़ा कदम उठाते हुए खुद आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। ट्रस्ट ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सीधे तौर पर अनुरोध किया है कि इस पूरे मामले की गहराई से जांच कराने के लिए तत्काल एक ‘विशेष जांच दल’ यानी एसआईटी का गठन किया जाए। ट्रस्ट का कहना है कि यह मामला सिर्फ पैसों का नहीं, बल्कि देश-विदेश के करोड़ों राम भक्तों की अटूट आस्था और भरोसे से जुड़ा हुआ है।
पारदर्शी और निष्पक्ष जांच जरूरी, दोषियों पर हो कड़ा एक्शन
सदन और सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक लगातार राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर तरह-तरह के दावे और अफवाहें तैर रही थीं। इसी वजह से राम मंदिर की देखरेख करने वाले मुख्य आधिकारिक ट्रस्ट ने तय किया कि अब इन भ्रामक बातों पर चुप रहना ठीक नहीं है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजे गए पत्र में ट्रस्ट ने मुख्य रूप से तीन बड़ी मांगें उठाई हैं। पहली मांग यह है कि मामले की जांच के लिए निष्पक्ष एसआईटी गठित हो। दूसरी मांग में ट्रस्ट ने साफ किया है कि यह जांच पूरी तरह से पारदर्शी और बिना किसी दबाव या तरफदारी के होनी चाहिए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण मांग में कहा गया है कि यदि जांच के दौरान कोई भी व्यक्ति गड़बड़ी या चोरी का दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ बिना किसी नरमी के बेहद सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाए।
पूर्व लेखा अधिकारी के आरोपों और सियासी बयानबाजी के बाद गर्माया मुद्दा
गौरतलब है कि राम मंदिर में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए दर्शन मार्ग और परिसर में करीब चार दर्जन (48) बड़े दान पात्र रखे गए हैं, जिनमें रोजाना भारी मात्रा में नकदी और सोने-चांदी के आभूषण अर्पित किए जाते हैं। इस व्यवस्था पर विवाद तब गहराया जब मंदिर के पूर्व मुख्य लेखा अधिकारी (चीफ एकाउंट्स ऑफिसर) महिपाल सिंह ने ट्रस्ट प्रबंधन पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि उन्होंने एक बार लगभग 5 लाख रुपये की नकदी की चोरी को रंगे हाथों पकड़ा था, लेकिन सीनियर अधिकारियों को रिपोर्ट करने के बाद उन्हें पद से हटा दिया गया। विपक्ष, विशेषकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और स्थानीय नेताओं ने भी इस मुद्दे को लपकते हुए सरकार और ट्रस्ट को घेरा था, जिसके बाद मामला प्रधानमंत्री कार्यालय तक भी पहुंच गया था।
“चढ़ावे और ऑडिट की पूरी व्यवस्था कंप्यूटरीकृत”: चंपत राय
हालांकि, इन आरोपों को शुरुआत से ही पूरी तरह निराधार बताते हुए ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने स्थिति स्पष्ट की थी। ट्रस्ट के मुताबिक, राम मंदिर में दान पात्रों से पैसे निकालने, उनकी गिनती करने, उन्हें सुरक्षित बैंक तक पहुंचाने और डिपॉजिट करने की पूरी प्रक्रिया अत्यधिक आधुनिक, सीसीटीवी कैमरों की निगरानी से लैस और पूरी तरह कंप्यूटरीकृत है। इस पूरी वित्तीय व्यवस्था का प्रबंधन और ऑडिट देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक ‘स्टेट बैंक ऑफ इंडिया’ के अधिकारियों की देखरेख में बेहद पारदर्शी तरीके से किया जाता है। ट्रस्ट चाहता है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा गठित की जाने वाली एसआईटी इस पूरे मामले की जांच करे, ताकि उन तत्वों और चेहरों का पर्दाफाश किया जा सके जो सोशल मीडिया पर भ्रामक और झूठी अफवाहें फैलाकर राम मंदिर की छवि और करोड़ों सनातनियों की आस्था को ठेस पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।