डिजिटल डेस्क- बिहार के भोजपुर जिले का बिलौटी गाँव आज, 24 जून को एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक आंदोलन का गवाह बनने जा रहा है। जनसरोकार के मुद्दों को उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता भरत भूषण तिवारी की पुलिस मुठभेड़ में मौत के खिलाफ आज महापंचायत बुलाई गई है। सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष तक के नेता इस एनकाउंटर को ‘फर्जी’ करार दे रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों और परिजनों का साफ आरोप है कि भरत तिवारी पर पहले से कोई आपराधिक मामला नहीं था और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो गवाही दे रहा है कि उन्होंने एनकाउंटर से पहले अपना हथियार फेंककर सरेंडर कर दिया था, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें गोली मारी।
‘आप रक्षक हैं शिकारी नहीं’— रोशन आनंद ने पुलिस को घेरा
इस बीच, ‘ज्ञान बिंदु GS एकेडमी’ के डायरेक्टर रोशन आनंद का इस मामले पर बेहद तीखा और भावुक बयान सामने आया है। पुलिस की थ्योरी को कटघरे में खड़ा करते हुए उन्होंने कहा, “पुलिस को तो रक्षक होना चाहिए, लेकिन आज वे शिकारी बन गए हैं। भरत तिवारी मर्डर केस इसका एक जीता-जागता उदाहरण है। जब भरत तिवारी ने सरेंडर कर दिया था, तो उन्हें एनकाउंटर में क्यों मारा गया?” अपने व्यक्तिगत दर्द को साझा करते हुए रोशन आनंद ने आगे कहा, “अगर मुझे झूठे केस में गिरफ्तार न किया गया होता, तो मेरा भाई आज हमारे साथ होता। प्रशासन को यह बात समझनी चाहिए कि जनता आपसे न्याय की उम्मीद करती है, इसकी सही जांच होनी ही चाहिए।”
‘मानसिक अस्वस्थ’ की थ्योरी वर्सेस ‘सरेंडर’ का वो रहस्यमयी वीडियो
इस पूरे मामले में पुलिस की शुरुआती कहानी और जमीनी हकीकत के बीच गहरा सस्पेंस बना हुआ है। पुलिस ने 16 जून को दिए अपने बयान में भरत तिवारी को कथित तौर पर ‘मानसिक रूप से अस्वस्थ’ बताया था और दावा किया था कि भरत लगातार पुलिस पर फायरिंग कर रहे थे, जिसके जवाब में पुलिस ने आत्मरक्षा में उनके पैर में गोली मारी। लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने पुलिस के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं, जिसमें भरत एनकाउंटर से ठीक पहले अपना हथियार फेंकते हुए साफ दिखाई दे रहे हैं।
तत्कालीन SDPO और SHO समेत कई पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज
चौतरफा दबाव और राजनीतिक विवाद गहराने के बाद आखिरकार कानून का शिकंजा खुद खाकी पर कसना शुरू हो गया है। मंगलवार, 23 जून को भोजपुर एसपी कार्यालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, मृतक भरत तिवारी की माँ की शिकायत के आधार पर शाहपुर थाने में एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली गई है। यह प्राथमिकी तत्कालीन जगदीशपुर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) राजेश वर्मा, तत्कालीन शाहपुर थाना प्रभारी और एनकाउंटर की इस खूनी पटकथा में शामिल अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ दर्ज की गई है।
बिहार सरकार ने दिए न्यायिक जांच के आदेश
भरत तिवारी की मौत के बाद से ही बिहार का सियासी पारा चढ़ा हुआ है। चौतरफा घिरी बिहार सरकार ने शनिवार को ही इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच कराने का आदेश दे दिया था। अब जहाँ एक तरफ पुलिस टीम के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू हो चुकी है, वहीं आज होने वाली महापंचायत से इस मामले में इंसाफ की लड़ाई और तेज होने की उम्मीद है।