Knews Desk- केंद्र सरकार ने विदेशों में छिपे भगोड़े अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर अहम आंकड़े जारी किए हैं। गृह मंत्रालय के मुताबिक, 2019 से जुलाई 2026 के बीच 36 देशों से कुल 274 भगोड़ों को भारत वापस लाया गया है। इनमें आतंकवाद, गैंगस्टर गतिविधियों, हत्या, यौन अपराध, ड्रग तस्करी, वित्तीय धोखाधड़ी और मानव तस्करी जैसे गंभीर मामलों में वांछित आरोपी शामिल हैं।
गृह मंत्रालय के अनुसार, 2019 से 2026 के दौरान मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) के तहत भगोड़े अपराधियों से जुड़ी करीब 17,874 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है। वहीं, देश छोड़कर भागे आर्थिक अपराधियों से जुड़े मामलों में करीब 18,762 करोड़ रुपये की राशि वापस हासिल की गई है।
विदेशों में छिपे वांछित अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की कार्रवाई भी तेज हुई है। आंकड़ों के मुताबिक, 2022 में 40 रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए गए थे। इसके बाद 2023 में 100, 2024 में 107 और 2025 में 112 नोटिस जारी हुए। साल 2026 में अब तक यह संख्या बढ़कर 182 तक पहुंच गई है।
गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 तक इस साल 45 भगोड़ों को भारत वापस लाया गया। इससे पहले 2025 में 70, 2024 में 43, 2023 में 37, 2022 में 40, 2021 में 23, 2020 में 7 और 2019 में 9 भगोड़ों की वापसी हुई थी।
किन अपराधों में वांछित थे ये भगोड़े?
भारत वापस लाए गए अपराधियों पर कई गंभीर मामलों में मुकदमे दर्ज हैं। इनमें आतंकवादी और राष्ट्रविरोधी गतिविधियां, नार्को टेरर, संगठित अपराध, गैंगस्टर गतिविधियां, जबरन वसूली, हत्या, डकैती, दुष्कर्म, POCSO से जुड़े अपराध, ड्रग तस्करी, फर्जी करेंसी, साइबर अपराध, मानव तस्करी और अपहरण जैसे मामले शामिल हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, 62 भगोड़े हत्या, डकैती और दूसरे हिंसक अपराधों से जुड़े मामलों में वांछित थे। 53 पर यौन अपराध, दुष्कर्म और POCSO से संबंधित मामले थे। इसके अलावा 45 अन्य आपराधिक मामलों, 42 संगठित अपराध, गैंगस्टर और जबरन वसूली तथा 18 मानव तस्करी और अपहरण से जुड़े मामलों में वांछित थे।
वहीं, 15 भगोड़े आतंकवाद और नार्को टेरर, 16 ड्रग्स से संबंधित अपराधों और 12 फर्जी करेंसी, साइबर अपराध एवं तस्करी से जुड़े मामलों में शामिल बताए गए हैं। नौ भगोड़े धोखाधड़ी और वित्तीय अपराधों के मामलों में वांछित थे।
भगोड़ों को भारत लाने में क्यों आती हैं मुश्किलें?
गृह मंत्रालय ने बताया कि प्रत्यर्पण की प्रक्रिया में कई कानूनी और न्यायिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। अलग-अलग देशों के कानून, दोहरी आपराधिकता जैसे सिद्धांत और न्यायिक प्रक्रियाओं के कारण कई बार प्रत्यर्पण अनुरोध आगे नहीं बढ़ पाते या खारिज हो जाते हैं।
इसके अलावा विभिन्न एजेंसियों और विभागों के बीच समन्वय, विदेशों में मौजूद भगोड़ों की सही लोकेशन का पता लगाने, सूचनाओं के आदान-प्रदान और रेड कॉर्नर नोटिस की प्रक्रिया में होने वाली देरी भी बड़ी चुनौती रही है।
गृह मंत्रालय के मुताबिक, मौजूदा केंद्र सरकार ने विदेशों में छिपे भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाने और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई को प्राथमिकता दी है।