लोग चलते-फिरते गाली देते हैं….. रुचिका मामले पर सौरव दास का बड़ा बयान

KNEWS DESK- जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाली रुचिका सिंह के समर्थन में सीजेपी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास सामने आए हैं। उन्होंने रुचिका के खिलाफ दर्ज एफआईआर और पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी की भाषा की आलोचना की जा सकती है, लेकिन इसके लिए आपराधिक कानून का इस्तेमाल उचित नहीं है।

सौरव दास ने कहा कि यदि किसी प्रदर्शनकारी ने आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया है तो उसकी सार्वजनिक रूप से निंदा की जा सकती है, लेकिन उसे अपराध मानकर पुलिस कार्रवाई करना उचित नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया, “इस देश में गाली देना कब से क्रिमिनल ऑफेंस बन गया? लोग चलते-फिरते गाली देते हैं।” उनके मुताबिक, ऐसे मामलों में आपराधिक न्याय प्रणाली का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों और प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाया जा रहा है। सौरव दास ने कहा कि पुलिस और प्रशासन को अपनी शक्तियों का इस्तेमाल संयम के साथ करना चाहिए और किसी व्यक्ति को केवल उसकी टिप्पणी के आधार पर आपराधिक मामले में घेरना लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है। सौरव दास ने अपने बयान में संसद सदस्यों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कई सांसदों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामलों में आरोप लंबित हैं, लेकिन उन मामलों में सरकार उतनी सक्रिय नजर नहीं आती। उनका कहना था कि यदि किसी व्यक्ति ने आपत्तिजनक शब्द कह दिए हैं और उसी आधार पर उसे पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है, तो इसकी आलोचना होनी चाहिए।

उन्होंने सरकार और पुलिस से अपील करते हुए कहा कि छात्र प्रदर्शनकारियों को परेशान करना बंद किया जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि रुचिका सिंह को भी अनावश्यक रूप से निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। उनके अनुसार, इस तरह के मामलों में पुलिस का दुरुपयोग स्वीकार्य नहीं है। दरअसल, 23 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान रुचिका सिंह द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने का मामला सामने आया था। इसके बाद इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस टिप्पणी से प्रधानमंत्री कार्यालय की गरिमा को ठेस पहुंची है और इससे सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका पैदा हुई।

इस मामले में नोएडा के एक्सप्रेसवे थाना में ‘जीरो एफआईआर’ दर्ज की गई। जीरो एफआईआर वह प्रक्रिया है जिसके तहत किसी भी थाने में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है, भले ही घटना किसी अन्य क्षेत्र में हुई हो। बाद में संबंधित थाने को मामला स्थानांतरित किया जाता है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 352, 353(1) और 356(1) के तहत मामला दर्ज किया है। इन धाराओं में शांति भंग करने के लिए उकसाने, सार्वजनिक अशांति फैलाने वाले बयान देने और मानहानि जैसे आरोप शामिल हैं। फिलहाल मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।

रुचिका सिंह के खिलाफ दर्ज एफआईआर और सौरव दास के समर्थन वाले बयान के बाद यह मामला राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय बन गया है। एक ओर शिकायतकर्ता पुलिस कार्रवाई को उचित बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सौरव दास जैसे लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और आपराधिक कानून के इस्तेमाल से जुड़ा मुद्दा बता रहे हैं।

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