KNEWS DESK- महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नितेश राणे एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में आ गए हैं। बकरीद से पहले दिए गए उनके बयान ने सियासी हलकों में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने त्योहारों और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर टिप्पणी करते हुए कई तीखे सवाल उठाए, जिसके बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है।
नितेश राणे ने कहा कि जब होली और दिवाली जैसे त्योहार आते हैं, तो लोगों को अलग-अलग तरह की सलाह दी जाती है। उन्होंने कहा कि होली सूखी मनाने और दिवाली में पटाखों से बचने की बातें कही जाती हैं।
इसी संदर्भ में उन्होंने विवादित टिप्पणी करते हुए कहा कि जो लोग ऐसे सुझाव देते हैं, उन्हें बकरीद के लिए “कंप्यूटर पर बकरे की तस्वीर लगाकर वर्चुअली कुर्बानी” देने की सलाह देनी चाहिए।
राणे ने अपने बयान में यह भी कहा कि त्योहारों को लेकर दी जाने वाली सलाहों में संतुलन होना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि पर्यावरण की चिंता करने वाले लोग इस तरह के सुझाव अन्य त्योहारों पर क्यों नहीं देते।
उन्होंने आगे कहा कि समाज में एकता और परंपराओं को लेकर समझ विकसित होनी चाहिए, और त्योहारों को लेकर अनावश्यक विवाद नहीं खड़ा किया जाना चाहिए।
अपने बयान के दौरान नितेश राणे ने वीर सावरकर का भी उल्लेख किया और कहा कि समाज को अपने भीतर भी सुधार की जरूरत है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ लोग ही समाज में भ्रम फैलाने का काम करते हैं।
इसके अलावा उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में नेरल जैसे क्षेत्रों में हिंदू एकता को मजबूत करने की बात कही। उन्होंने लिखा कि हिंदू समाज को एकजुट रहकर अपनी एकता का परिचय देना चाहिए।
नितेश राणे के इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। विपक्षी दलों की ओर से इस टिप्पणी को लेकर आलोचना की संभावना जताई जा रही है, जबकि उनके समर्थक इसे एक राजनीतिक और सामाजिक टिप्पणी बता रहे हैं।