KNEWS DESK- केंद्र सरकार किसानों को नकली और घटिया गुणवत्ता वाले बीजों से बचाने के लिए नया बीज अधिनियम लाने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित कानून को संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में पेश किया जा सकता है। नए कानून में नकली बीजों के कारोबार पर सख्ती के साथ-साथ बीजों की गुणवत्ता, पंजीकरण और ट्रेसबिलिटी को अनिवार्य बनाने का प्रावधान किया गया है।
तीन श्रेणियों में बांटे जाएंगे अपराध
प्रस्तावित बीज अधिनियम में उल्लंघनों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। पहली श्रेणी में मामूली नियमों का उल्लंघन करने वाले कारोबारियों को रखा जाएगा। पहली बार गलती होने पर चेतावनी दी जाएगी, जबकि दूसरी बार उल्लंघन करने पर 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।
दूसरी श्रेणी में जानबूझकर किए गए उल्लंघन शामिल होंगे। इनमें बीज के पैकेट पर QR कोड नहीं लगाना, जरूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराना और गलत ब्रांडिंग जैसे मामले शामिल हैं। ऐसे अपराधों पर पहली बार एक लाख रुपये और दूसरी बार दो लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। तीसरी श्रेणी में गंभीर अपराधों को रखा गया है। नकली बीज बेचना, बिना पंजीकरण के कारोबार करना और जानबूझकर धोखाधड़ी करना इसी श्रेणी में आएगा। ऐसे मामलों में दोषियों पर 30 लाख रुपये तक का जुर्माना और जेल की सजा का प्रावधान प्रस्तावित है।
हर बीज पैकेट पर QR कोड अनिवार्य
नए कानून के तहत हर बीज पैकेट पर QR कोड लगाना अनिवार्य होगा। किसान इस कोड के जरिए बीज की उत्पत्ति, निर्माता, प्रयोगशाला से मिली मंजूरी और सप्लाई चेन में उसकी आवाजाही की जानकारी हासिल कर सकेंगे। सभी बीजों और रोपण सामग्री का राष्ट्रीय रजिस्टर में पंजीकरण जरूरी होगा। बिना पंजीकरण वाले बीजों को अवैध माना जाएगा और उन्हें बाजार में बेचने की अनुमति नहीं होगी। सभी बीज किस्मों को एकीकृत राष्ट्रीय ऑनलाइन रजिस्टर में दर्ज किया जाएगा, जिसे केंद्र और राज्य सरकारें इस्तेमाल कर सकेंगी।
किसानों के पारंपरिक बीज अधिकार सुरक्षित
सरकार के अनुसार, नया कानून किसानों के पारंपरिक बीज अधिकारों को सीमित नहीं करेगा। किसान पारंपरिक और किसान किस्म के बीजों का इस्तेमाल, आदान-प्रदान और बिक्री पहले की तरह कर सकेंगे। पारंपरिक बीजों का पंजीकरण अनिवार्य नहीं होगा। व्यक्तिगत उपयोग, गांव में वितरण या किसी कंपनी के लिए बीज तैयार करने वाले किसानों को डिजिटल पंजीकरण से छूट दी जाएगी।
बीज फेल होने पर 15 दिन में मुआवजा
प्रस्तावित कानून में प्रत्येक राज्य में सीड सिक्योरिटी फंड बनाने का प्रावधान है। जुर्माने और अन्य रिकवरी से मिलने वाली राशि इस फंड में जमा होगी। बीज फेल होने से किसान को नुकसान होने पर सत्यापन समिति मामले की जांच करेगी और 15 दिनों के भीतर मुआवजा देने की व्यवस्था की जाएगी।
सरकार का कहना है कि मौजूदा बीज अधिनियम 1966 का है और बीज नियंत्रण आदेश 1983 में लागू हुआ था। बदलती परिस्थितियों में यह कानून पर्याप्त नहीं है। अब तक मसौदे पर किसानों और संगठनों से करीब 18 हजार सुझाव मिल चुके हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 10 सितंबर को 20 किसान संगठनों के साथ बैठक कर सुझाव लिए।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, बीज अधिनियम शीतकालीन सत्र में लाया जाएगा। हालांकि, संसद का विशेष सत्र बुलाने का विकल्प भी खुला रखा गया है।