KNEWS DESK- दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर पैलेट गन के इस्तेमाल का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। पूर्व आईपीएस अधिकारी यशोवर्धन आजाद समेत तीन याचिकाकर्ताओं ने शीर्ष अदालत में जनहित याचिका दायर कर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पैलेट गन और धातु वाले प्रोजेक्टाइल के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की है।
संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर इस याचिका में पूर्व आईपीएस अधिकारी यशोवर्धन आजाद के साथ प्रशांत कुमार सिंह और शेख इरशाद मंसूरी भी याचिकाकर्ता हैं। दोनों का दावा है कि वे 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ‘संसद चलो’ प्रदर्शन के दौरान रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की पैलेट फायरिंग में घायल हुए थे। यह याचिका वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर के माध्यम से दाखिल की गई है।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की है कि 20 जुलाई की घटना में घायल सभी लोगों को उचित मुआवजा, मुफ्त इलाज, पुनर्वास और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उनका कहना है कि पैलेट गन के इस्तेमाल से कई प्रदर्शनकारियों को गंभीर चोटें आईं और यह नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
प्रशांत कुमार सिंह का दावा है कि वह शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल थे और बिना किसी उकसावे के उन पर पैलेट गन से फायरिंग की गई। वहीं, 26 वर्षीय शेख इरशाद मंसूरी का कहना है कि वह पासपोर्ट और वीजा संबंधी काम से कनॉट प्लेस गए थे और उसी दौरान RAF की फायरिंग की चपेट में आकर घायल हो गए।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन के दौरान RAF ने पंप-एक्शन गन से धातु के छोटे-छोटे पैलेट दागे, जो भीड़ में मौजूद लोगों के शरीर में धंस गए। इससे कई लोगों को गंभीर चोटें आईं, तेज दर्द हुआ और रक्तस्राव हुआ।
याचिका में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 148 का भी हवाला दिया गया है। इसमें कहा गया है कि किसी भी भीड़ को तितर-बितर करने से पहले उसे स्पष्ट चेतावनी देना और शांतिपूर्ण तरीके से हटने का अवसर देना अनिवार्य है। यदि इसके बाद भी स्थिति नियंत्रित न हो, तो पहले सिविल फोर्स का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान शाम करीब 4 से 4:30 बजे के बीच पुलिस और RAF ने पहले आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया, जिसके बाद अचानक पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक लगाने और पीड़ितों को न्याय दिलाने की मांग की गई है।