KNEWS DESK- राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड के बाद प्रशासन ने अवैध निर्माण और सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर सख्त रुख अपना लिया है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने साफ कर दिया है कि हादसे के बाद जिस खतरनाक और अवैध इमारत को ध्वस्त किया गया, उसे गिराने में सरकारी मशीनरी पर आया पूरा खर्च अब संबंधित बिल्डिंग मालिक से वसूला जाएगा।

एलडीए के अधिकारियों के अनुसार, इमारत को गिराने के लिए जेसीबी मशीनें, श्रमिक, सुरक्षा कर्मी और अन्य संसाधनों का इस्तेमाल किया गया था। इन सभी पर हुए खर्च का विस्तृत आकलन करने के लिए एक विशेष समिति का गठन किया गया है। यह समिति एक-दो दिनों के भीतर बैठक कर ध्वस्तीकरण अभियान में हुए सभी खर्चों का हिसाब तैयार करेगी।
समिति की रिपोर्ट के आधार पर कुल लागत तय होने के बाद एलडीए बिल्डिंग मालिक के खिलाफ रिकवरी सर्टिफिकेट (RC) जारी करेगा। इसके बाद नियमानुसार पूरी राशि की वसूली की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि नियमों की अनदेखी और लापरवाही के कारण सरकारी संसाधनों पर जो अतिरिक्त बोझ पड़ा है, उसकी भरपाई संबंधित भवन स्वामी से ही कराई जाएगी। प्रशासन का मानना है कि अलीगंज अग्निकांड ने अवैध निर्माण और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के गंभीर परिणामों को उजागर किया है। इसी वजह से एलडीए ने इस मामले में सख्त कार्रवाई का फैसला लिया है, ताकि भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
अधिकारियों ने कहा कि यह कार्रवाई केवल एक इमारत तक सीमित नहीं रहेगी। यदि भविष्य में किसी अवैध, जर्जर या खतरनाक भवन को हटाने के लिए सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल करना पड़ा, तो उसका पूरा वित्तीय भार संबंधित मालिक को ही उठाना होगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अवैध निर्माण करने वालों के खिलाफ किसी भी तरह की नरमी नहीं बरती जाएगी। एलडीए का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य केवल सरकारी खर्च की भरपाई करना नहीं, बल्कि लोगों को यह संदेश देना भी है कि भवन निर्माण से जुड़े नियमों और सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य है। नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ आर्थिक जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।
अलीगंज अग्निकांड के बाद राजधानी में अवैध और असुरक्षित इमारतों की जांच भी तेज कर दी गई है। प्रशासन विभिन्न क्षेत्रों में ऐसे भवनों की पहचान कर रहा है, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके और भविष्य में किसी बड़े हादसे को रोका जा सके। प्रशासन का कहना है कि सार्वजनिक सुरक्षा से समझौता करने वालों के खिलाफ आगे भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।