JPSC-JSSC विवाद: छात्रों के समर्थन में सोनम वांगचुक, धरना स्थल पहुंचे बाबूलाल मरांडी; 10 अगस्त को मार्च

Knews Desk– झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी की भर्ती प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहा सत्याग्रह धरना अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। धरना 12वें दिन और अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल चौथे दिन भी जारी रही। खराब मौसम और लगातार बारिश के बावजूद छात्रों का उत्साह कम नहीं हुआ। आंदोलनकारी छात्रों ने तिरंगा यात्रा निकालकर सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया और ऐलान किया कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो 10 अगस्त को विधानसभा मार्च किया जाएगा।

छात्रों का कहना है कि जेपीएससी और जेएसएससी की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता का पालन नहीं किया गया। उनका आरोप है कि चयन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं, लेकिन सरकार अब तक निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने से बच रही है। आंदोलनकारी मांग कर रहे हैं कि पूरे मामले की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच कराई जाए, ताकि युवाओं का भर्ती प्रक्रिया पर भरोसा दोबारा कायम हो सके।आंदोलन को उस समय और मजबूती मिली जब प्रसिद्ध इनोवेटर और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने वीडियो कॉल के माध्यम से छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो से बातचीत की। वांगचुक ने आंदोलनकारियों का हालचाल जाना और उनके स्वास्थ्य की चिंता जताई। छात्रों के मुताबिक, वांगचुक के आग्रह पर भूख हड़ताल पर बैठे देवेंद्र नाथ महतो ने जल ग्रहण किया। इस घटनाक्रम के बाद आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा मिलने लगी है।

वहीं, झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी भी धरना स्थल पहुंचे और आंदोलनकारी छात्रों से मुलाकात की। उन्होंने छात्रों का मांग-पत्र प्राप्त किया और उनकी मांगों को उचित बताते हुए आंदोलन का समर्थन किया। मरांडी ने कहा कि भर्ती प्रक्रियाओं में यदि किसी तरह की गड़बड़ी हुई है तो सरकार को निष्पक्ष जांच करानी चाहिए और युवाओं को न्याय दिलाना चाहिए।आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल विरोध प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि झारखंड के लाखों युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करना है। उनका कहना है कि जब तक भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं होती और कथित अनियमितताओं की जांच पूरी नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। छात्रों ने स्पष्ट किया कि 10 अगस्त को प्रस्तावित विधानसभा मार्च शांतिपूर्ण तरीके से निकाला जाएगा और इसमें बड़ी संख्या में अभ्यर्थी शामिल होंगे।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच कई सवाल सरकार के सामने खड़े हो रहे हैं। यदि सरकार छात्रों के आरोपों को गलत मानती है, तो अब तक पूरे मामले की स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की गई? अगर भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष रही है, तो स्वतंत्र जांच कराने में हिचकिचाहट क्यों है? वहीं यदि आरोपों में सच्चाई है, तो युवाओं के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील मामले में जिम्मेदारी तय करने में इतनी देरी क्यों हो रही है?10 अगस्त को होने वाला विधानसभा मार्च इस आंदोलन की दिशा तय करने वाला अहम पड़ाव माना जा रहा है। अब सरकार के सामने चुनौती केवल आंदोलन को समाप्त कराने की नहीं, बल्कि भर्ती प्रक्रिया पर उठे भरोसे के संकट को दूर करने और युवाओं के सवालों का संतोषजनक जवाब देने की भी है। आने वाले दिनों में सरकार का रुख और छात्रों की रणनीति इस आंदोलन की आगे की दिशा तय करेगी।

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