डिजिटल डेस्क- लोकसभा में महिला आरक्षण बिल और परिसीमन (डिलिमिटेशन) प्रस्तावों पर चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार को खुद पता है कि यह विधेयक अपने मौजूदा स्वरूप में लागू नहीं हो पाएगा, फिर भी इसे लाया गया है ताकि राजनीतिक संदेश दिया जा सके। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण बिल का असली मकसद महिलाओं को सशक्त बनाना नहीं, बल्कि देश के चुनावी नक्शे को बदलना है। उन्होंने कहा कि यह एक “पैनिक रिएक्शन” था, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसी भी कीमत पर दो संदेश देना चाहते थे पहला, भारत का चुनावी बैलेंस बदलना और दूसरा, खुद को महिलाओं का समर्थक दिखाना। उन्होंने कहा, “बीजेपी बेवकूफ नहीं है, उन्हें पता था कि यह बिल पास नहीं हो सकता, लेकिन फिर भी इसे लाया गया।” राहुल के मुताबिक, यह कदम राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है, जिसमें महिला आरक्षण को एक कवर के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।
इसका महिलाओं के सशक्तिकरण से कोई लेना-देना नहीं है- राहुल गांधी
राहुल गांधी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “यह महिलाओं का बिल नहीं है, इसका महिलाओं के सशक्तिकरण से कोई लेना-देना नहीं है। यह भारत के चुनावी नक्शे को बदलने की कोशिश है।” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार चुनाव क्षेत्रों के पुनर्गठन के जरिए OBC, दलित और अन्य पिछड़े वर्गों की राजनीतिक आवाज को कमजोर करना चाहती है। उन्होंने जाति जनगणना का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकार इसे जानबूझकर दरकिनार कर रही है। राहुल गांधी ने कहा कि असली सवाल यह है कि क्या जाति जनगणना के आंकड़ों का इस्तेमाल संसद और विधानसभाओं में प्रतिनिधित्व तय करने के लिए किया जाएगा या नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अगले 15 वर्षों तक इस मुद्दे को प्रतिनिधित्व से अलग रखने की कोशिश कर रही है।
दलितों, OBC के साथ भेदभाव हुआ है- राहुल गांधी
अपने भाषण में राहुल गांधी ने कहा कि भारतीय समाज में दलितों, OBC और उनकी महिलाओं के साथ ऐतिहासिक रूप से भेदभाव हुआ है। ऐसे में सरकार का यह कदम इन वर्गों को और कमजोर करने वाला साबित हो सकता है। उन्होंने कहा, “मेरे OBC भाई-बहनों से पावर छीनने की कोशिश की जा रही है।” राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी देश के राजनीतिक नक्शे को बदलने की कोशिश कर रही है, जैसा कि पहले असम और जम्मू-कश्मीर में देखा गया। उन्होंने कहा कि अब यही प्रयोग पूरे देश में लागू करने की तैयारी है, जिसके लिए संवैधानिक संशोधन की जरूरत होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि पूरा विपक्ष इस कदम का विरोध करेगा और लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर करने की किसी भी कोशिश को सफल नहीं होने देगा। राहुल गांधी के अनुसार, यह बिल महिलाओं के प्रतिनिधित्व से ज्यादा “पॉलिटिकल इंजीनियरिंग” का हिस्सा है।