टिकट चाहिए तो पद छोड़िए! अखिलेश यादव की नई रणनीति से सपा में हलचल तेज

KNEWS DESK – Akhilesh Yadav ने 2027 विधानसभा चुनाव को देखते हुए समाजवादी पार्टी में बड़ा संगठनात्मक बदलाव शुरू कर दिया है। सपा प्रमुख ने साफ संदेश दिया है कि जो नेता विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं, उन्हें पहले संगठन के पद से इस्तीफा देना होगा। पार्टी के इस फैसले को 2027 चुनाव के लिए “डू ओर डाई” रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

दरअसल, समाजवादी पार्टी नहीं चाहती कि संगठन और चुनावी दावेदारी एक साथ चलें। पार्टी का मानना है कि यदि जिलाध्यक्ष या पदाधिकारी टिकट की दौड़ में रहते हुए संगठन संभालेंगे, तो गुटबाजी और अंदरूनी खींचतान बढ़ेगी। इसी वजह से अब चुनाव लड़ने की इच्छा रखने वाले नेताओं से पद छोड़ने को कहा गया है।

इस फैसले के बाद कई नेताओं ने संगठनात्मक पदों से इस्तीफा देना शुरू भी कर दिया है। Reebu Srivastava ने चुनाव लड़ने की तैयारी में अपना पद छोड़ा है। वहीं Munindra Shukla ने भी बिठूर सीट से दावेदारी के लिए जिलाध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया। बरेली के सपा अध्यक्ष Shivcharan Kashyap और मुजफ्फरनगर के जिलाध्यक्ष Zia Chaudhary ने भी चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर करते हुए पद छोड़ने की पेशकश की है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अखिलेश यादव इस बार टिकट बंटवारे और संगठन में किसी तरह का भ्रम नहीं चाहते। पार्टी का फोकस उन सीटों पर है, जहां 2022 में बहुत कम अंतर से हार मिली थी। सपा नेतृत्व मानता है कि यदि संगठन में बेहतर तालमेल और अनुशासन बना रहा तो 2027 में सत्ता वापसी की संभावना मजबूत हो सकती है।

दरअसल, ऐसा ही प्रयोग समाजवादी पार्टी लोकसभा चुनाव में भी कर चुकी है। उस समय Naresh Uttam Patel को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर चुनाव लड़ाया गया था और वह सांसद बने थे। अब उसी मॉडल को विधानसभा चुनाव में बड़े स्तर पर लागू करने की तैयारी मानी जा रही है।

हाल ही में हुई पार्टी बैठक में अखिलेश यादव ने जिलाध्यक्षों को साफ चेतावनी दी थी कि किसी भी नेता को टिकट दिलाने का “ठेका” न लें। उन्होंने कहा था कि यदि कोई संगठन पदाधिकारी चुनाव लड़ना चाहता है तो पहले इस्तीफा दे और फिर अपनी दावेदारी पेश करे।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले से पार्टी को संगठनात्मक फायदा जरूर मिलेगा, लेकिन असंतोष पूरी तरह खत्म होगा, ऐसा मानना मुश्किल है। हालांकि सपा नेतृत्व का मानना है कि गुटबाजी रोककर और मजबूत समन्वय बनाकर ही 2027 में भाजपा को चुनौती दी जा सकती है।

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