KNEWS DESK- भारत और दक्षिण कोरिया के बीच रणनीतिक और आर्थिक सहयोग को नई मजबूती मिली है। नरेंद्र मोदी और ली जे म्युंग ने भारत-कोरिया बिजनेस लीडर्स डायलॉग में भाग लेकर द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। इस दौरान दोनों नेताओं ने उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की और कई महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoUs) का आदान-प्रदान भी हुआ।

कार्यक्रम के दौरान दोनों नेताओं के बीच गर्मजोशी भरा माहौल देखने को मिला। पीएम मोदी और राष्ट्रपति ली ने साथ में समूह फोटो खिंचवाई और सेल्फी भी ली, जो इस साझेदारी की सहजता और मजबूती को दर्शाती है।
बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वैश्विक तनाव के इस दौर में भारत और दक्षिण कोरिया शांति, स्थिरता और सहयोग का संदेश दे रहे हैं। उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि दक्षिण कोरिया ने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन और इंडो-पैसिफिक महासागर पहल से जुड़ने का फैसला किया है। उनके अनुसार, यह कदम क्षेत्रीय सहयोग को नई दिशा देगा।
पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देश मिलकर एक शांतिपूर्ण, प्रगतिशील और समावेशी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता पर भी जोर दिया और बताया कि इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच सहमति बनी है।
प्रधानमंत्री ने महान कवि रवीन्द्रनाथ टैगोर का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने कोरिया को ‘लैम्प ऑफ द ईस्ट’ कहा था, और आज वही कोरिया विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में अहम भागीदार बन रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत-दक्षिण कोरिया की साझेदारी न केवल दोनों देशों बल्कि वैश्विक स्तर पर भी प्रगति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करेगी।
वहीं राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने प्रधानमंत्री मोदी और भारत सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें भारत की यात्रा के दौरान मिले आतिथ्य से बेहद खुशी हुई है। उन्होंने भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और तेजी से उभरती आर्थिक शक्ति बताया। उन्होंने यह भी कहा कि आठ वर्षों बाद दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति के रूप में भारत की राजकीय यात्रा करना उनके लिए विशेष महत्व रखता है।
दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि लोकतांत्रिक मूल्य, बाजार आधारित अर्थव्यवस्था और कानून का शासन दोनों देशों की साझी ताकत हैं। चिप निर्माण, जहाज निर्माण, तकनीक, पर्यावरण और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने पर सहमति बनी है।
यह मुलाकात भारत और दक्षिण कोरिया के बीच संबंधों को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है, जो आने वाले समय में रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करेगी।