KNEWS DESK – प्रधानमंत्री Narendra Modi ने लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पर हुई बहस के दौरान विपक्ष और सभी राजनीतिक दलों से इसे समर्थन देने की अपील की। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह किसी एक पार्टी का नहीं, बल्कि देश की नारी शक्ति के अधिकारों से जुड़ा मुद्दा है।
“विरोध करेंगे तो मुझे फायदा होगा”
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि कुछ लोगों को लगता है कि इस विधेयक में उनका राजनीतिक स्वार्थ छिपा है। लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर विपक्ष इसका विरोध करता है तो उन्हें राजनीतिक फायदा मिल सकता है, जबकि साथ देने पर वे पूरा श्रेय विपक्ष को देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, “मुझे कोई क्रेडिट नहीं चाहिए। आप चाहें तो सारा श्रेय ले लें, मैं सभी को धन्यवाद देने और उनकी तस्वीरें छपवाने के लिए भी तैयार हूं।”
“यह भारत का सांस्कृतिक संकल्प है”
प्रधानमंत्री ने महिला आरक्षण को भारत की लोकतांत्रिक परंपरा और सांस्कृतिक प्रतिबद्धता से जोड़ते हुए कहा कि यह देश की सोच और मूल्यों का हिस्सा है। उन्होंने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि संवेदनशील मुद्दों पर ठोस फैसले लेना समय की जरूरत होती है और उसका असर लंबे समय तक दिखता है।
“महिलाओं को कुछ दे नहीं रहे, उनका हक लौटा रहे हैं”
पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि महिलाओं को आरक्षण देना कोई एहसान नहीं, बल्कि उनका अधिकार है। उन्होंने कहा, “हमें यह सोचने की जरूरत नहीं कि हम महिलाओं को कुछ दे रहे हैं, यह उनका हक है, जिसे दशकों से रोका गया है। अब समय है उस गलती को सुधारने का।”
हर राज्य के साथ न्याय का भरोसा
प्रधानमंत्री ने यह भी आश्वासन दिया कि इस प्रक्रिया में देश के किसी भी राज्य या क्षेत्र के साथ भेदभाव नहीं होगा। उत्तर, दक्षिण, पूर्व या पश्चिम—सभी राज्यों के लिए समान और न्यायसंगत व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि पहले हुए परिसीमन के आधार पर ही आगे की प्रक्रिया चलेगी।
अपने भाषण के अंत में पीएम मोदी ने सभी दलों से अपील की कि इस विधेयक को राजनीति के तराजू पर न तौला जाए। उन्होंने कहा कि यह देशहित का मुद्दा है और इसे टालना अब उचित नहीं है।