KNEWS DESK- नेपाल-तिब्बत सीमा के पास आई भीषण फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। बाढ़ के कारण नेपाल के कई इलाकों में सड़कें, पुल और हाइड्रोपावर परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं। नेपाल पुलिस के मुताबिक, आपदा में कम से कम 157 लोगों की मौत हुई है और सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में लापता लोगों की संख्या 750 से अधिक बताई गई है। इनमें 133 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं।
इस प्राकृतिक आपदा का असर अब नेपाल से सटे भारतीय राज्यों पर भी पड़ने की आशंका है। बिहार के आपदा प्रबंधन विभाग ने चेतावनी दी है कि नेपाल से आने वाली बाढ़ की लहर गंडक नदी में प्रवेश कर सकती है और इसकी ऊंचाई करीब 3 मीटर तक हो सकती है। इसके मद्देनजर पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली समेत कई जिलों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। सीतामढ़ी और शिवहर जैसे संवेदनशील जिलों पर भी लगातार नजर रखी जा रही है।
बिहार में हालात को देखते हुए गंडक बराज के सभी 36 फाटक खोल दिए गए हैं, ताकि पानी के दबाव को नियंत्रित किया जा सके। अधिकारियों के मुताबिक, बराज से करीब 1.50 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। प्रशासन की ओर से संवेदनशील और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी की गई है। राहत और बचाव कार्यों के लिए NDRF और SDRF की टीमें भी तैयार रखी गई हैं।
उत्तर प्रदेश में भी नेपाल से आने वाली नदियों के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है। गंडक के अलावा घाघरा और राप्ती जैसी नदियों में भी पानी बढ़ने की आशंका जताई गई है। केंद्र सरकार ने स्थिति को गंभीरता से लेते हुए बिहार और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों से संपर्क किया है और NDRF की टीमों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
नेपाल में जारी राहत और बचाव अभियान के बीच भारत भी सहायता पहुंचा रहा है। वहीं, विशेषज्ञ और प्रशासनिक अधिकारी लगातार नदी के जलस्तर और बाढ़ के संभावित प्रभाव की निगरानी कर रहे हैं। फिलहाल दोनों राज्यों में प्रशासन को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।