भारत-पाक समेत एशिया के 5 देशों पर LNG संकट की मार, गैस बिल बढ़कर 70 हजार करोड़ रुपये

KNEWS DESK- अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और होर्मुज स्ट्रेट से LNG सप्लाई में रुकावट का असर एशियाई देशों पर पड़ रहा है। भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, थाईलैंड और वियतनाम ने महंगी स्पॉट LNG खरीदने पर कुल 7.4 अरब डॉलर खर्च किए हैं। यह रकम पिछले साल इसी अवधि में लॉन्ग टर्म कॉन्ट्रैक्ट के तहत खरीदी गई गैस की लागत से दोगुने से भी ज्यादा है।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल इन देशों ने इतनी ही मात्रा में LNG के लिए करीब 3.1 अरब डॉलर खर्च किए थे। सप्लाई बाधित होने के बाद इन देशों को तत्काल जरूरत पूरी करने के लिए स्पॉट मार्केट का सहारा लेना पड़ा, जहां कीमतें काफी ऊंची हैं। भारतीय मुद्रा में यह अतिरिक्त बोझ करीब 70 हजार करोड़ रुपये बैठता है। इस संकट का सबसे ज्यादा असर उन अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है, जो बिजली उत्पादन और उद्योगों के लिए आयातित गैस पर निर्भर हैं। कतर से होने वाली LNG सप्लाई भी प्रभावित हुई है। तनाव से पहले वैश्विक LNG शिपमेंट में कतर की हिस्सेदारी करीब पांचवां हिस्सा थी।

महंगी गैस के कारण एशियाई देश अब ऊर्जा रणनीति में बदलाव पर विचार कर रहे हैं। पाकिस्तान सोलर और हाइड्रोपावर पर निर्भरता बढ़ा सकता है। बांग्लादेश ने कतर की सप्लाई की भरपाई के लिए 2 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च किए हैं और रूफटॉप सोलर को बढ़ावा देने के लिए इंसेंटिव दे रहा है। थाईलैंड ने 2050 तक कम से कम 65 फीसदी बिजली रिन्यूएबल एनर्जी से हासिल करने का लक्ष्य रखा है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, गैस की कीमतें ऊंची रहने पर वियतनाम और फिलीपींस जैसे देश कोयले की ओर लौट सकते हैं। वहीं, करीब 80 फीसदी LNG खरीदार अपनी खरीद रणनीति में बदलाव और अलग-अलग देशों से सप्लाई लेने की तैयारी कर रहे हैं। महंगी LNG के चलते एशिया में कई गैस आधारित पावर प्रोजेक्ट्स भी रद्द या स्थगित हो चुके हैं।

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