KNEWS DESK- नई दिल्ली में आयोजित ‘हरा भरा स्वराज: राजीव गांधी के दृष्टिकोण को श्रद्धांजलि’ कार्यक्रम में राहुल गांधी ने RSS पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी का विचार था कि हर जीवित व्यक्ति एक अद्वितीय इकाई है और सत्य तक पहुंचने का उसका अपना रास्ता होता है। राहुल गांधी ने कहा कि कोई व्यक्ति दूसरे इंसान के जीवन के अनुभवों और परिस्थितियों को पूरी तरह नहीं समझ सकता। उन्होंने RSS पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी समस्या यही है कि संघ ने यह मान लिया है कि वह देश के करोड़ों लोगों का ‘सच’ जानता है।
उन्होंने कहा, “मैं आपको नहीं बता सकता कि आपका सच क्या है। अगर मैं यह मानने लगूं कि मैं आपका सच जानता हूं, तो यह गलत होगा, क्योंकि मैं आप नहीं हूं।” राहुल ने जोर दिया कि केवल संबंधित व्यक्ति ही अपने जीवन की वास्तविकता और अपने सत्य को सबसे बेहतर तरीके से समझ सकता है।
अनुभव अलग, इसलिए सच भी अलग
राहुल गांधी ने कहा कि हर व्यक्ति का जीवन अलग परिस्थितियों से बनता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने जो अनुभव किया है, वह जरूरी नहीं कि सामने वाले व्यक्ति ने भी अनुभव किया हो। किसी के परिवार, माता-पिता, दोस्त और जीवन की परिस्थितियां अलग हो सकती हैं।
उन्होंने सवाल किया कि जब किसी व्यक्ति ने दूसरे की जिंदगी नहीं जी है, तो वह यह दावा कैसे कर सकता है कि वह उस व्यक्ति का सत्य जानता है। इसी संदर्भ में उन्होंने RSS पर आरोप लगाया कि संगठन देश के लोगों के लिए सत्य की एक निश्चित परिभाषा तय करना चाहता है।
स्वराज का मतलब सिर्फ आजादी नहीं
राहुल गांधी ने स्वराज की अवधारणा को भी गांधीवादी विचारों से जोड़कर समझाया। उन्होंने कहा कि आम तौर पर स्वराज को आजादी समझा जाता है, लेकिन इसका अर्थ केवल बाहरी स्वतंत्रता नहीं बल्कि ‘स्व पर राज’ भी है।
उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के लिए स्वराज का मतलब था कि व्यक्ति अपने ऊपर शासन करने और अपनी जिम्मेदारियों को समझने की क्षमता विकसित करे। राहुल के मुताबिक, गांधी चाहते थे कि देश का हर व्यक्ति स्वराज के इसी रास्ते पर आगे बढ़े।
व्यक्ति की स्वतंत्रता पर जोर
राहुल गांधी ने कहा कि लोकतंत्र में किसी व्यक्ति के विचार, अनुभव और जीवन की दिशा को जबरन तय नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक, हर नागरिक को अपने अनुभवों के आधार पर अपनी राह चुनने और अपने सत्य को समझने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। RSS पर निशाना साधते हुए राहुल ने कहा कि किसी समूह या संगठन को यह अधिकार नहीं होना चाहिए कि वह पूरे देश के लोगों के लिए एक ही सत्य निर्धारित कर दे। उन्होंने छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों का भी जिक्र करते हुए कहा कि लोगों के अनुभव और परिस्थितियां अलग-अलग होती हैं और उन्हें समझना जरूरी है।
राहुल गांधी का यह बयान ऐसे समय आया है जब कांग्रेस और RSS के बीच वैचारिक मतभेद लगातार राजनीतिक बहस का हिस्सा बने हुए हैं। उनके बयान ने एक बार फिर व्यक्ति की स्वतंत्रता, स्वराज और देश की वैचारिक दिशा को लेकर बहस को तेज कर दिया है।