‘हर नागरिक को गरिमा से जीने का अधिकार’… नोएडा प्रदर्शन केस में सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल

KNEWS DESK – Supreme Court of India ने नोएडा में मजदूरों के प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किए गए दो लोगों के कथित पुलिस टॉर्चर मामले पर सुनवाई करते हुए अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने साफ कहा कि “हर नागरिक को गरिमा के साथ जीने का अधिकार है” और मजदूरों के साथ अमानवीय व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए।

यह मामला उस समय सामने आया जब प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किए गए दो आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट में दावा किया कि पुलिस हिरासत में उन्हें प्रताड़ित किया गया। मामले की सुनवाई जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की बेंच ने की।

सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों आरोपियों को अपने सामने पेश करने का निर्देश दिया। जब कोर्ट ने सीधे आरोपियों से बातचीत की, तो उनमें से एक ने दावा किया कि हिरासत के दौरान उसे टॉर्चर किया गया था। इस पर जस्टिस नागरत्ना ने पूछा कि क्या दोनों फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं और टिप्पणी की कि मामला अब बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका जैसा हो गया है।

आरोपियों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंसाल्वेस ने अदालत में कहा कि पुलिस हिरासत में टॉर्चर की आशंका को देखते हुए उन्हें डर है कि पुलिस दोबारा रिमांड मांग सकती है। उन्होंने दलील दी कि पूछताछ की जा सकती है, लेकिन आरोपियों को पुलिस हिरासत में नहीं भेजा जाना चाहिए।

वहीं सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता नटराज ने कोर्ट को बताया कि मामले से जुड़ी जब्त की गई सभी चीजें मजिस्ट्रेट के सामने पेश कर दी गई हैं।

सुनवाई के दौरान जस्टिस के.वी. विश्वनाथन ने पूछा कि क्या आरोपियों ने जमानत याचिका दाखिल की है। इस पर कॉलिन गोंसाल्वेस ने बताया कि जमानत याचिका दायर की गई थी, लेकिन हरियाणा और यूपी पुलिस दोनों उन्हें तुरंत हिरासत में लेने की कोशिश कर रही थीं।

कोर्ट ने जब पूछा कि क्या यह उसी अपराध से जुड़ा मामला है, तो गोंसाल्वेस ने कहा कि दोनों लोग केवल नोएडा में मौजूद थे और उन्हें इस तरह निशाना बनाया जा रहा है।

सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि “कानून को अपना काम करने देना चाहिए।” हालांकि, याचिकाकर्ताओं की ओर से स्पष्ट किया गया कि वे फिलहाल जमानत नहीं, बल्कि पुलिस हिरासत से सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। इसी दौरान अदालत ने टिप्पणी की कि मजदूरों के साथ इस तरह का व्यवहार नहीं होना चाहिए और हर इंसान के सम्मान की रक्षा जरूरी है।

मामले में कॉलिन गोंसाल्वेस ने स्वतंत्र जांच और Central Bureau of Investigation से जांच कराने की मांग भी की। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके मुवक्किल को आधी रात में उठाया गया और वकीलों के साथ भी बदसलूकी हुई। गोंसाल्वेस ने दावा किया कि अदालत परिसर के बाहर से छह वकीलों को हिरासत में लिया गया और उन्हें अज्ञात स्थान पर ले जाया गया।

सुनवाई के अंत में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि दोनों आरोपियों की न्यायिक हिरासत फिलहाल जारी रहेगी, जब तक मामले पर आगे सुनवाई नहीं हो जाती। इसी दौरान वकील शाहरुख आलम ने अदालत को बताया कि एक पत्रकार की गिरफ्तारी के बाद लगातार गिरफ्तारियां हुईं और 12 मई को उसके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी NSA के तहत भी कार्रवाई की गई।

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