KNEWS DESK- तमिलनाडु की राजनीति में मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के विधायकों को मुफ्त कार देने के ऐलान पर सियासी घमासान शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री की ओर से राज्य के सभी 234 विधायकों को कार और हर महीने ईंधन व सहायक के खर्च के लिए 1 लाख रुपये की आर्थिक मदद देने की घोषणा की गई थी। विपक्षी दल DMK ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है।
विधानसभा में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि DMK के सभी 59 विधायक इस योजना का लाभ नहीं लेंगे। उन्होंने सरकार की आर्थिक स्थिति और बढ़ते कर्ज का हवाला देते हुए कहा कि जब सरकार लगातार आर्थिक तंगी की बात कर रही है, तब विधायकों को मुफ्त कार देना उचित नहीं है। उदयनिधि ने सरकार से सभी विधायकों के चुनावी हलफनामों की जांच कराने की भी मांग की। उनका कहना है कि सरकारी वाहन की सुविधा केवल जरूरतमंद और आर्थिक रूप से कमजोर विधायकों को ही मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी पूछा कि जिन विधायकों के पास पहले से वाहन हैं, उन्हें मुफ्त कार देने का क्या औचित्य है।
वहीं, सत्तारूढ़ TVK के विधायकों ने मुख्यमंत्री के फैसले का स्वागत किया। कुछ विधायकों ने सदन में गीत गाकर भी मुख्यमंत्री का आभार जताया। हालांकि, कुछ विधायकों के पुराने चुनावी हलफनामे सामने आने के बाद इस योजना को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं। उदयनिधि स्टालिन ने मुख्यमंत्री विजय पर पिछली DMK सरकार से जुड़ी भ्रष्टाचार की फाइलों को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने मांग की कि यदि सरकार के पास भ्रष्टाचार के पुख्ता सबूत हैं तो फाइलों को सार्वजनिक कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार इन फाइलों को सार्वजनिक करने में देरी क्यों कर रही है।
मुफ्त कार योजना और भ्रष्टाचार की फाइलों को लेकर विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। इससे तमिलनाडु की राजनीति में सियासी टकराव और बढ़ने के संकेत हैं।