KNEWS DESK – जयपुर के चर्चित अमायरा मौत मामले में अब सभी की निगाहें 31 जुलाई की सुनवाई पर टिकी हैं। मामले की अगली सुनवाई कल (31 जुलाई) जिला एवं सत्र न्यायालय के बाल न्यायालय (स्पेशल कोर्ट) में होगी, जहां अदालत यह तय करेगी कि मामले में अतिरिक्त धाराएं जोड़ी जाएंगी या नहीं और आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ेगी।
इससे पहले एसीजेएम-10 (मेट्रो-प्रथम) अदालत ने मामले में प्रारंभिक संज्ञान लेते हुए इसे बाल न्यायालय भेज दिया था। पीड़ित पक्ष ने मामले में जूवेनाइल जस्टिस (JJ) एक्ट की धारा 75 समेत अन्य गंभीर धाराएं जोड़ने की मांग की थी। इसी वजह से मजिस्ट्रेट ने अंतिम फैसला सुनाने के बजाय मामले को विशेष अदालत के पास भेजना उचित समझा।
इस केस में नामजद चारों आरोपी—क्लास टीचर पुनीता शर्मा, प्रिंसिपल इंदु दुबे, स्कूल संचालक सौरभ मोदी और सफाईकर्मी रामू—को अदालत से जमानत मिल चुकी है। हालांकि, पीड़ित परिवार ने इस फैसले पर कड़ा विरोध जताया है और कहा है कि वे बाल न्यायालय में सभी तथ्यों और सबूतों के साथ अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि पुलिस की जांच ‘लापरवाही से हुई मौत’ के आधार पर है और इस स्तर पर आत्महत्या जैसी दलीलों पर विचार नहीं किया जा सकता। वहीं, पीड़ित पक्ष ने मामले को गंभीर बताते हुए बच्चों के प्रति क्रूरता से जुड़ी धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग दोहराई।
क्या है पूरा मामला?
पिछले साल 1 नवंबर को जयपुर के मानसरोवर स्थित नीरजा मोदी स्कूल में पढ़ने वाली 9 वर्षीय छात्रा अमायरा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। शुरुआती जांच में मामला कथित आत्महत्या का सामने आया। घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया था, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था। इसके बाद अमायरा के पिता विजय मीणा और परिवार ने स्कूल प्रशासन, क्लास टीचर, प्रिंसिपल और स्कूल संचालक पर गंभीर लापरवाही और उत्पीड़न के आरोप लगाए। परिवार का आरोप है कि स्कूल प्रशासन की लापरवाही और बच्ची के साथ हुए कथित व्यवहार ने इस दर्दनाक घटना को जन्म दिया। मामले को लेकर प्रदेशभर में आक्रोश देखने को मिला, जिसके बाद पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की। अब पीड़ित परिवार की मांग है कि आरोपियों के खिलाफ जूवेनाइल जस्टिस (JJ) एक्ट की धारा 75 समेत अन्य सख्त धाराओं में कार्रवाई कर उन्हें कड़ी सजा दिलाई जाए। मामले की अगली सुनवाई कल यानी 31 जुलाई को बाल न्यायालय में होगी, जहां आगे की कानूनी प्रक्रिया पर फैसला लिया जाएगा।