Knews Desk- पंजाब में हाल ही में उभरे संगठनात्मक मतभेदों के शांत होने के बाद कांग्रेस अब विधानसभा चुनाव की तैयारियों में पूरी तरह जुट गई है। इसी कड़ी में पार्टी ने राज्यभर में व्यापक संगठनात्मक अभियान शुरू करने का फैसला किया है। पंजाब कांग्रेस के प्रभारी और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 30 जुलाई से 8 अगस्त तक राज्य के विभिन्न जिलों का दौरा करेंगे।
इस दौरान भूपेश बघेल हर जिले में कांग्रेस के जिला अध्यक्षों, पदाधिकारियों और वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक करेंगे। इन बैठकों का उद्देश्य संगठन को मजबूत करना, कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद स्थापित करना और आगामी विधानसभा चुनाव के लिए रणनीति तैयार करना है। बूथ स्तर से लेकर जिला स्तर तक संगठन को सक्रिय करने के लिए भी विस्तृत योजना बनाई जाएगी।
बैठकों में प्रत्येक जिले की राजनीतिक स्थिति और संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा की जाएगी। साथ ही जनसंपर्क अभियान, संगठन विस्तार और चुनावी तैयारियों पर नेताओं से फीडबैक लिया जाएगा, ताकि चुनाव से पहले पार्टी की जमीनी पकड़ को मजबूत किया जा सके।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, भूपेश बघेल का यह दौरा पंजाब कांग्रेस के चुनावी अभियान की औपचारिक शुरुआत माना जा रहा है। उनके कार्यक्रम के तहत 30 जुलाई को चंडीगढ़ पहुंचने के बाद 31 जुलाई को फतेहगढ़ साहिब और मोहाली, 1 अगस्त को पटियाला और संगरूर, 2 अगस्त को बरनाला और मानसा, 3 अगस्त को बठिंडा और श्री मुक्तसर साहिब, 4 अगस्त को फाजिल्का और फिरोजपुर, 5 अगस्त को मोगा और फरीदकोट, 6 अगस्त को लुधियाना (शहरी और ग्रामीण), 7 अगस्त को मालेरकोटला और खन्ना तथा 8 अगस्त को शहीद भगत सिंह नगर और रोपड़ का दौरा शामिल है।
गौरतलब है कि कुछ सप्ताह पहले पंजाब कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष के पद को लेकर विवाद गहरा गया था। कांग्रेस नेतृत्व द्वारा अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखने के फैसले के बाद पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और उनके समर्थकों ने असहमति जताई थी। हालांकि बाद में पार्टी नेतृत्व की पहल पर दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई और मतभेद कम होते दिखाई दिए।
16 जुलाई को चरणजीत सिंह चन्नी और उनके सहयोगियों ने कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल से लंबी बैठक की थी। बैठक के बाद चन्नी ने कहा था कि उन्होंने अपनी बात पार्टी नेतृत्व के सामने रख दी है और अब पार्टी में सब कुछ सामान्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी नेता आलाकमान के साथ हैं और पार्टी की एकजुटता बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है। अब कांग्रेस इसी एकजुटता के साथ आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को तेज करने में जुट गई है।