चुनाव नतीजों पर कांग्रेस का धमाका, पवन खेड़ा ने चुनाव आयोग को बताया कीचड़ का साथी, वोट चोरी और SIR के जरिए धांधली का लगाया आरोप

डिजिटल डेस्क- देश के पांच राज्यों के चुनाव परिणाम आने के बाद सियासी गलियारों में आरोपों-प्रत्यारोपों का दौर तेज हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव आयोग और सत्ता पक्ष पर हमला बोलते हुए पूरी चुनावी प्रक्रिया पर ही गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खेड़ा ने चुनाव में धांधली के लिए ‘वोट चोरी’ से लेकर ‘परिसीमन’ और SIR तक का मुद्दा उठाया है। पवन खेड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में SIR का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि इसके जरिए जानबूझकर लक्षित वोट कटौती की गई है। उन्होंने दावा किया कि जिन सीटों पर जीत-हार का अंतर कम रहता था, वहां योजनाबद्ध तरीके से 10 से 20 हजार महत्वपूर्ण वोटों को काटा गया। खेड़ा ने तंज कसते हुए कहा कि पहले वोट चोरी की गई और अब परिसीमन के जरिए सिस्टम पर चोट की जा रही है।

चुनाव आयोग पर तीखा प्रहार

चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए पवन खेड़ा ने कहा कि चुनाव आयोग का काम नफरती भाषणों और समाज में ‘कीचड़’ फैलने से रोकना था, लेकिन आयोग खुद उस ‘कीचड़’ में लोटता नजर आया। उन्होंने चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि “वह चोरों के साथ मिल गए हैं और उन्हें विधानसभा तक ले जा रहे हैं।” खेड़ा ने चुनाव प्रक्रिया पर पूरी तरह ‘कब्जे’ की बात कही।

बंगाल हिंसा और मुस्लिम लीग वाले बयान पर पलटवार

भाजपा द्वारा कांग्रेस को ‘मुलिम लीग’ बताए जाने के आरोपों पर पलटवार करते हुए खेड़ा ने आंकड़ों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासित राज्यों में 78 प्रतिशत हिंदू विधायक और 12 प्रतिशत मुस्लिम विधायक होने के बावजूद भाजपा का आईटी सेल और मुख्यधारा की मीडिया कांग्रेस को मुस्लिम लीग बताकर भ्रम फैलाती है। वहीं, पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हुई हिंसा के पीछे खेड़ा ने ‘दिल्ली’ (केंद्र सरकार) का हाथ बताया। उन्होंने इसे ‘दादागिरी’ करार देते हुए प्रधानमंत्री से इसे रोकने की अपील की। खेड़ा ने मांग की कि बंगाल की जिन सीटों पर लोगों को वोट देने से रोका गया और जहां जीत का अंतर बहुत कम है, वहां दोबारा मतदान कराया जाए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले का स्वतः संज्ञान लेने का भी आग्रह किया। तमिलनाडु और केरल के नतीजों पर टिप्पणी करते हुए खेड़ा ने कहा कि इन राज्यों में कमल इसलिए नहीं खिला क्योंकि वहां ‘कीचड़’ नहीं फैलाया जा सका। वहीं, विजय की पार्टी TVK को समर्थन देने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह फैसला राज्य में नफरत की राजनीति (कीचड़) को रोकने के लिए लिया गया है। उन्होंने 2013 के घटनाक्रम का जिक्र करने वालों को भी करारा जवाब दिया।

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