डिजिटल डेस्क- बिहार के भोजपुर में पिछले सप्ताह हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में सातवें दिन प्रशासन ने एक बड़ी कार्रवाई की है। इस पूरे मामले को लेकर उठे गंभीर सवालों के बीच जगदीशपुर के डीएसपी राजेश शर्मा को अगले आदेश तक पुलिस मुख्यालय अटैच (लाइन हाजिर) कर दिया गया है। राजेश शर्मा को हटाए जाने के तुरंत बाद पंकज मिश्रा को जगदीशपुर का नया डीएसपी नियुक्त किया गया है, ताकि क्षेत्र की कानून व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाया जा सके। इस मामले में पुलिस की मुश्किलें तब और बढ़ गईं जब मृतक भरत भूषण तिवारी की माँ के आवेदन पर बड़ी कानूनी कार्रवाई की गई। भोजपुर पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, परिजनों की शिकायत के आधार पर शाहपुर थाने में तत्कालीन जगदीशपुर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ/डीएसपी), तत्कालीन शाहपुर थाना प्रभारी (एसएचओ) और एनकाउंटर की घटना में शामिल अन्य सभी पुलिसकर्मियों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है।
हथियार डालने के बाद एनकाउंटर पर उठे राजनीतिक और सामाजिक सवाल
भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी की पिछले सप्ताह बुधवार को पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई थी। इस घटना के बाद से ही पुलिस की थ्योरी सवालों के घेरे में है। परिजनों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि जब भरत ने हथियार डाल दिए थे, तो उसके बाद भी एनकाउंटर क्यों किया गया? इस घटना के बाद से पूरे राज्य में एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है और पुलिस की निष्पक्षता पर लगातार उंगलियां उठ रही हैं।
न्याय की मांग को लेकर बिलौटी गांव में महापंचायत
इस एनकाउंटर मामले में निष्पक्ष जांच और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग को लेकर बुधवार (24 जून) को दोपहर 12 बजे से भरत तिवारी के पैतृक गांव बिलौटी में एक विशाल महापंचायत का आयोजन किया गया है। इस महापंचायत का मुख्य उद्देश्य मामले की उच्च स्तरीय जांच के लिए दबाव बनाना है। इस कार्यक्रम में बिहार के अलावा देश के कई अन्य राज्यों से भी भारी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना जताई जा रही है।
कई बड़े सामाजिक और धार्मिक संगठन हुए लामबंद
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर समाज के विभिन्न वर्गों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। बिलौटी में आयोजित इस महापंचायत में करणी सेना, परशुराम महासभा, हिंदू महासभा, ब्राह्मण महासभा और हिंदू जागरण मंच सहित कई प्रमुख सामाजिक और धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की बात सामने आई है। इन सभी संगठनों ने एक सुर में घटना की कड़ी निंदा करते हुए दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की है।