KNEWS DESK – देश के सर्वोच्च संवैधानिक भवन राष्ट्रपति भवन में गुरुवार को एक ऐतिहासिक पल देखने को मिला। पहली बार बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, पारंपरिक वेशभूषा और लोक परंपराओं का भव्य प्रदर्शन राष्ट्रपति भवन में हुआ। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बस्तर का 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति भवन पहुंचा, जहां राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सभी का आत्मीय स्वागत किया।

राष्ट्रपति ने खुद परोसा भोजन
कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों से आत्मीय बातचीत की और उन्हें स्वयं भोजन परोसा। उन्होंने बस्तर की जनजातीय संस्कृति, लोककलाओं और परंपराओं की सराहना करते हुए कलाकारों और पारंपरिक प्रतिनिधियों का उत्साह बढ़ाया।
राष्ट्रपति ने कहा कि बस्तर दशहरा और बस्तर पंडुम जैसे आयोजन भारत की सांस्कृतिक विविधता को दुनिया के सामने प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने भविष्य में इन आयोजनों में शामिल होने की इच्छा भी जताई।
‘झिटकू-मिटकी’ की कलाकृति ने जीता दिल
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति को बस्तर की करीब 300 वर्ष पुरानी लोकगाथा ‘झिटकू-मिटकी’ पर आधारित एक विशेष कलाकृति भेंट की। यह स्मृति-चिह्न प्रेम, समर्पण, त्याग और जनजातीय लोकआस्था का प्रतीक माना जाता है। इस कलाकृति को देखकर राष्ट्रपति मुर्मू भावुक और प्रभावित नजर आईं।
बस्तर की संस्कृति की जमकर तारीफ
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि बस्तर पंडुम छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोककला और परंपराओं का जीवंत उत्सव है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ पर्यटन और स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा देते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि बस्तर आज शांति, विकास और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। शिक्षा, सड़क, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की भी उन्होंने सराहना की।
अमित शाह ने भी जताई खुशी
इस मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि वह कई बार राष्ट्रपति भवन आ चुके हैं, लेकिन पहली बार उन्होंने यहां बस्तर की पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा में इतना बड़ा प्रतिनिधिमंडल देखा है। उन्होंने इसे देश की सांस्कृतिक विविधता का शानदार उदाहरण बताया।
मुख्यमंत्री साय ने दिया निमंत्रण
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को बस्तर आने का औपचारिक निमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का बस्तर दौरा जनजातीय संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान देगा और स्थानीय लोगों के लिए प्रेरणादायक होगा।
कार्यक्रम के अंत में प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति भवन का भ्रमण भी किया और देश की लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक विरासत से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।