मध्य प्रदेश में गेहूं घोटाले का आरोप, वेयरहाउस पहुंचने से पहले 86 हजार क्विंटल अनाज गायब होने का दावा

Knews Desk- मध्य प्रदेश में समर्थन मूल्य पर खरीदे गए गेहूं को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि किसानों से खरीदा गया करीब 86 हजार क्विंटल गेहूं उपार्जन केंद्रों से वेयरहाउस तक पहुंचने से पहले ही गायब हो गया। मामला प्रदेश के 16 जिलों से जुड़ा बताया जा रहा है। घटना सामने आने के बाद राज्य सरकार ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।

सरकार किसानों से समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदती है। इसके बाद खरीदे गए अनाज को सुरक्षित वेयरहाउस तक पहुंचाने की जिम्मेदारी प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की होती है। लेकिन इस बार रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में बड़ा अंतर सामने आने का दावा किया गया है। शुरुआती जांच में पता चला है कि हजारों क्विंटल गेहूं का हिसाब नहीं मिल रहा है। बताया जा रहा है कि सबसे ज्यादा गेहूं सागर जिले में गायब होने की बात सामने आई है। यहां करीब 14 हजार क्विंटल गेहूं का अंतर मिला है। इसके अलावा जबलपुर, नर्मदापुरम, विदिशा, सतना, आगर-मालवा, उज्जैन, राजगढ़, शाजापुर, रीवा, रायसेन, सिवनी और अन्य जिलों में भी गेहूं की कमी सामने आई है।

जांच में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, कुल करीब 86 हजार क्विंटल गेहूं वेयरहाउस तक नहीं पहुंच पाया। इसकी अनुमानित कीमत करीब 23 करोड़ रुपये बताई जा रही है। हालांकि, आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद ही नुकसान और जिम्मेदारी की वास्तविक स्थिति साफ हो सकेगी। मामला सामने आने के बाद खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग सक्रिय हो गया है। विभाग की ओर से सभी संबंधित जिलों के अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए गए हैं। खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि सभी जिलों के कलेक्टर मामले की जांच कर रहे हैं। यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों से वसूली की जाएगी और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

वहीं, विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमला बोला है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि यह किसानों और जनता के पैसे से जुड़ा गंभीर मामला है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में गेहूं रास्ते में कैसे गायब हो गया और इसकी जिम्मेदारी किसकी है। विपक्ष ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर जांच जारी है और रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि गेहूं की कमी के पीछे लापरवाही थी या कोई बड़ा घोटाला।

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