KNEWS DESK- आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले में आदिवासियों की जमीन के कथित अधिग्रहण को लेकर भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। संजय सिंह का दावा है कि सीमेंट कंपनी के विस्तार के लिए करीब 950 एकड़ जमीन आदिवासी समुदाय से उनकी सहमति के बिना ली जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम यानी PESA Act के प्रावधानों का पालन नहीं किया गया।
संजय सिंह ने सरकार से कथित भूमि अधिग्रहण को तत्काल रोकने की मांग की है। उन्होंने इस मुद्दे को संसद में उठाने के लिए नोटिस देने की बात भी कही।
‘ग्राम पंचायतों की सहमति नहीं ली गई’
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संजय सिंह ने कहा कि सुंदरगढ़ का संबंधित इलाका अनुसूचित क्षेत्र में आता है और यहां जमीन से जुड़े मामलों में ग्राम सभा की भूमिका महत्वपूर्ण है। उनका आरोप है कि पांच ग्राम पंचायतों के करीब 11-12 गांवों की जमीन लेते समय स्थानीय लोगों की सहमति नहीं ली गई।
उन्होंने दावा किया कि पुलिस बल की मौजूदगी में जमीन पर कब्जा किया गया। संजय सिंह ने इसे आदिवासी समुदाय के अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए ओडिशा सरकार से मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
AAP सांसद ने आरोप लगाया कि जिन राज्यों में भाजपा की सरकार है, वहां किसानों, आदिवासियों और वंचित वर्गों की जमीन को लेकर लगातार विवाद सामने आ रहे हैं। उन्होंने बिहार का जिक्र करते हुए भी सरकार पर उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया।
जमीन मालिक ने बताया 2018 से जारी है लड़ाई
सुंदरगढ़ के जमीन मालिक राकेश रोशन भी आम आदमी पार्टी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद रहे। उन्होंने दावा किया कि स्थानीय लोग वर्ष 2018 से अपनी जमीन को लेकर संघर्ष कर रहे हैं।
राकेश रोशन के मुताबिक, प्रभावित लोगों को शुरुआत में जमीन से जुड़े बदलाव की जानकारी तक नहीं थी। उन्होंने दावा किया कि जब कुछ किसान अपना धान बेचने पहुंचे, तब उन्हें पता चला कि रिकॉर्ड में उनकी जमीन कम हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन किए, पदयात्रा निकाली और राज्यपाल कार्यालय के सामने भी धरना दिया। उनका आरोप है कि आंदोलन में शामिल कई लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए और कुछ लोगों की गिरफ्तारी भी हुई।
फसलों पर बुलडोजर चलाने का आरोप
राकेश रोशन ने आरोप लगाया कि जिस समय जमीन पर कार्रवाई की गई, उस दौरान खेतों में मसूर और उड़द जैसी फसलें लगी हुई थीं। उनका दावा है कि मशीनों के जरिए फसलों को हटाया गया और जमीन पर गहरे गड्ढे खोदे गए।
उन्होंने यह भी दावा किया कि करीब 27 एकड़ क्षेत्र में पत्थर निकालने के लिए खनन गतिविधियां चल रही हैं। उनका कहना है कि स्थानीय ग्राम सभा जमीन देने के पक्ष में नहीं थी।
राकेश रोशन के मुताबिक, आदिवासी परिवारों के लिए जमीन सिर्फ आजीविका का साधन नहीं, बल्कि उनकी सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि अगर जमीन चली जाती है तो आने वाली पीढ़ियों के सामने रोजगार और आजीविका का संकट पैदा हो सकता है।
AAP ने सरकार से की कार्रवाई रोकने की मांग
आम आदमी पार्टी के ओडिशा प्रदेश अध्यक्ष निशिकांत मोहपात्रा ने भी राज्य सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सुंदरगढ़ में आदिवासियों की सहमति के बिना जमीन लेने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
मोहपात्रा ने दावा किया कि इस पूरे मामले का असर करीब 10 हजार लोगों की आजीविका पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि पार्टी प्रभावित आदिवासी परिवारों के साथ खड़ी है और उनके अधिकारों की लड़ाई का समर्थन करेगी।
संसद में मुद्दा उठाने की तैयारी
संजय सिंह ने कहा कि उन्होंने सुंदरगढ़ के इस मामले को संसद में उठाने के लिए नोटिस दिया है। उन्होंने ओडिशा सरकार से मांग की कि जमीन अधिग्रहण से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जाए और अगर स्थानीय लोगों की सहमति नहीं ली गई है तो प्रक्रिया को तत्काल रोका जाए।
फिलहाल इन आरोपों पर ओडिशा सरकार या संबंधित कंपनी का विस्तृत पक्ष सामने आना बाकी है। ऐसे में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया, ग्राम सभा की सहमति और PESA Act के अनुपालन से जुड़े दावों की आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है।