सबूत मिले तो आरोपी की संपत्ति जब्त हो….. डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर CJI सूर्यकांत सख्त

KNEWS DESK- देशभर में बढ़ रहे ‘डिजिटल अरेस्ट स्कैम’ के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सख्त रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि इस तरह की धोखाधड़ी को कानून में अलग अपराध के रूप में परिभाषित करने पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि किसी आरोपी के खिलाफ पर्याप्त सबूत मिलते हैं, तो उसकी संपत्ति जब्त करने का भी कानूनी प्रावधान होना चाहिए।

सुनवाई के दौरान कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी ने बताया कि यह समस्या केवल व्हाट्सएप तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी चैट और कॉलिंग प्लेटफॉर्म पर मौजूद है। उन्होंने सुझाव दिया कि संदिग्ध कॉल या चैट के दौरान पहले चरण में यूजर को पॉप-अप चेतावनी दी जाए, ताकि वह संभावित धोखाधड़ी से सतर्क हो सके। दूसरे चरण में एआई की मदद से तय समय सीमा के बाद एक ‘किल स्विच’ सक्रिय हो, जो संदिग्ध कॉल को स्वतः समाप्त कर दे और पीड़ित को स्थिति समझने का मौका मिले।

CJI सूर्यकांत ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों में जबरन वसूली, धोखाधड़ी और लूट जैसे अपराध शामिल होते हैं। इसलिए इसे गंभीर कानूनी परिणामों वाले अलग अपराध के रूप में परिभाषित करने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या इस तरह के साइबर अपराधों की निगरानी और कार्रवाई के लिए कोई शीर्ष एजेंसी बनाई जानी चाहिए।

सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने भी डीपफेक तकनीक पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अब डीपफेक का इस्तेमाल लोगों की पहचान चुराकर धोखाधड़ी करने में किया जा रहा है। ऐसे नए साइबर अपराधों से निपटने के लिए मौजूदा कानूनों में सुधार और आवश्यक बदलाव किए जाने चाहिए। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट किसी नए अपराध की परिभाषा तय नहीं कर सकता, यह जिम्मेदारी विधायिका की है।

सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि इस मामले में वह जल्द ही विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करेगा, ताकि डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन ठगी के बढ़ते मामलों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।