अब पता चलेगा कौन क्या खरीद रहा है! सरकार जुटाएगी रिटेल बाजार का पूरा डेटा

Knews Desh- देश में लोग किन वस्तुओं पर कितना खर्च करते हैं, किस तरह के सामान की मांग ज्यादा है और अलग-अलग राज्यों में उपभोक्ताओं की खरीदारी की आदतें कैसी हैं, अब इसका विस्तृत रिकॉर्ड सरकार तैयार करने की योजना बना रही है। केंद्र सरकार देश का पहला रिटेल कंजम्प्शन सर्वे शुरू करने पर विचार कर रही है। इस सर्वे के जरिए खुदरा बाजार में होने वाली वास्तविक बिक्री और उपभोक्ता व्यवहार से जुड़ा डेटा जुटाया जाएगा।

इस प्रस्तावित सर्वे का संचालन सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा किया जाएगा। हालांकि, सर्वे की शुरुआत की तारीख और इसके विस्तृत स्वरूप को लेकर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। मंत्रालय फिलहाल इसके दायरे, प्रक्रिया और समय-सीमा को लेकर काम कर रहा है।

हर तरह के रिटेल कारोबार होंगे शामिल

प्रस्तावित रिटेल कंजम्प्शन सर्वे में देशभर के लगभग सभी प्रकार के खुदरा कारोबार को शामिल किया जाएगा। इसके तहत किराना दुकानों, सुपरमार्केट, मेडिकल स्टोर, कपड़ों की दुकानों, इलेक्ट्रॉनिक्स शोरूम, बर्तन की दुकानों, मशीनरी स्टोर और अन्य खुदरा प्रतिष्ठानों से जानकारी जुटाई जाएगी।

सरकार का उद्देश्य यह पता लगाना है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में उपभोक्ता किन उत्पादों को सबसे ज्यादा खरीद रहे हैं और बाजार में किस तरह की मांग बनी हुई है। सर्वे में रोजमर्रा की जरूरतों वाली वस्तुओं जैसे अनाज, दवाइयां, कपड़े और घरेलू सामान के साथ-साथ टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं जैसे टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की बिक्री का भी डेटा शामिल किया जाएगा। रिटेल कंजम्प्शन सर्वे मौजूदा हाउसहोल्ड कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर सर्वे (HCES) से अलग होगा। HCES में यह जानकारी जुटाई जाती है कि परिवार किसी निश्चित अवधि में कितनी वस्तुओं का इस्तेमाल करता है और उस पर कितना खर्च करता है।

वहीं, नया रिटेल सर्वे सीधे दुकानों से होने वाली बिक्री का रिकॉर्ड तैयार करेगा। उदाहरण के तौर पर यदि किसी परिवार ने दुकान से एक किलो चावल खरीदा और बाद में उसका आधा किलो ही इस्तेमाल किया, तो HCES में खपत आधा किलो दर्ज हो सकती है। लेकिन रिटेल कंजम्प्शन सर्वे में दुकानदार की बिक्री के आधार पर पूरा एक किलो रिकॉर्ड किया जाएगा। इससे बाजार में वास्तविक मांग और बिक्री की स्थिति का ज्यादा सटीक अनुमान लगाया जा सकेगा। देश में बढ़ते डिजिटल भुगतान ने भी खुदरा बाजार के रुझान को समझने में मदद की है। डिजिटल लेनदेन के आंकड़े बताते हैं कि लोग रोजमर्रा की खरीदारी से लेकर कपड़े और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों पर लगातार खर्च कर रहे हैं।

नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के आंकड़ों के अनुसार, जून महीने में किराना दुकानों और सुपरमार्केट में बड़ी मात्रा में डिजिटल लेनदेन दर्ज किए गए। इसके अलावा मेडिकल स्टोर, कपड़ों की दुकानों और अन्य खुदरा प्रतिष्ठानों में भी डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। इन आंकड़ों से सरकार को उपभोक्ता खर्च के पैटर्न को समझने में मदद मिल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि रिटेल कंजम्प्शन सर्वे से सरकार को महंगाई, उत्पादन, सप्लाई चेन और बाजार की मांग से जुड़े फैसले लेने में मदद मिलेगी। इससे यह समझना आसान होगा कि किन उत्पादों की मांग बढ़ रही है और किन क्षेत्रों में उपभोक्ता खर्च कमजोर हो रहा है।

उद्योग जगत के लिए भी यह डेटा महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। कंपनियां उपभोक्ताओं की पसंद और बाजार की जरूरतों को बेहतर तरीके से समझ सकेंगी। MoSPI का लक्ष्य सर्वे से मिलने वाले आंकड़ों को सरकारी रिकॉर्ड, प्रशासनिक डेटा और आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर ज्यादा सटीक आर्थिक आंकड़े तैयार करना है। इससे भविष्य में योजनाएं बनाने और नीतियां लागू करने में सरकार को बेहतर आधार मिल सकेगा।