SIR अभियान में बड़ी कार्रवाई: 4 राज्यों की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 22 लाख से अधिक नाम हटे, अब तक 13 राज्यों में करीब 6 करोड़ नाम हुए डिलीट

Knews Desk- देशभर में मतदाता सूची को अद्यतन और अधिक सटीक बनाने के उद्देश्य से चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) अभियान के तहत चार राज्यों की ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी कर दी गई है। आयोग के अनुसार, ओडिशा, मणिपुर, मिजोरम और सिक्किम में जारी नई ड्राफ्ट सूची से 22 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। हालांकि, जिन लोगों के नाम सूची से हटे हैं, उन्हें अंतिम सूची जारी होने से पहले अपना दावा या आपत्ति दर्ज कराकर नाम दोबारा शामिल कराने का अवसर दिया जाएगा।

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह केवल प्रारंभिक ड्राफ्ट सूची है। सभी दावों और आपत्तियों के निपटारे के बाद ही अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। आयोग का कहना है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य केवल पात्र और वास्तविक मतदाताओं को सूची में बनाए रखना है। एसआईआर अभियान की शुरुआत जून 2025 में की गई थी। इसके तहत आयोग विभिन्न राज्यों में मतदाता सूची का व्यापक सत्यापन कर रहा है। आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 13 राज्यों में इस अभियान के दौरान करीब 6 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा चुके हैं।

राज्यवार आंकड़ों पर नजर डालें तो बिहार में सबसे अधिक 65 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। इसके बाद पश्चिम बंगाल में 37 लाख और उत्तर प्रदेश में 25 लाख मतदाताओं के नाम डिलीट किए गए। ताजा चरण में ओडिशा, मणिपुर, मिजोरम और सिक्किम की ड्राफ्ट सूची से 22 लाख से ज्यादा नाम हटाए गए हैं। फिलहाल चुनाव आयोग 16 राज्यों और चार केंद्र शासित प्रदेशों में SIR अभियान चला रहा है। जिन राज्यों में यह प्रक्रिया जारी है, उनमें आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, ओडिशा, पंजाब, सिक्किम, त्रिपुरा, तेलंगाना और उत्तराखंड शामिल हैं। इसके अलावा दिल्ली, चंडीगढ़, दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में भी मतदाता सूची का पुनरीक्षण किया जा रहा है।

चुनाव आयोग के अनुसार, SIR अभियान का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची से मृत, स्थानांतरित या अपात्र मतदाताओं के नाम हटाना और पात्र नागरिकों के नाम शामिल करना है। आयोग का कहना है कि निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए मतदाता सूची का समय-समय पर सत्यापन आवश्यक है। इस प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद भी सामने आया है। हाल ही में इंडिया गठबंधन से जुड़े 23 विपक्षी दलों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर SIR अभियान की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि कई राज्यों में मतदाताओं के नाम मनमाने ढंग से हटाए जा रहे हैं और पूरी प्रक्रिया पर्याप्त रूप से पारदर्शी नहीं है।

वहीं, चुनाव आयोग अपने रुख पर कायम है। आयोग का कहना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण का अधिकार उसे संविधान और कानून के तहत प्राप्त है। मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने भी अपने फैसले में चुनाव आयोग के इस अधिकार को वैध ठहराया था। अदालत ने कहा था कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए मतदाता सूची का समय-समय पर पुनरीक्षण चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी का हिस्सा है। अब सभी की नजर उन राज्यों की अंतिम मतदाता सूची पर है, जो दावे और आपत्तियों के निपटारे के बाद जारी की जाएगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *