KNEWS DESK – जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दायर की गई है। याचिका में संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और सभी डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग की गई है।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुए कथित लाठीचार्ज का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। अधिवक्ता नरेंद्र मिश्रा ने शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल कर उन पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है, जिन पर प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग करने का आरोप है।
याचिका में कहा गया है कि मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए घटना से जुड़े सभी इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए। इसमें सीसीटीवी फुटेज, बॉडी-वॉर्न कैमरा रिकॉर्डिंग, ड्रोन फुटेज, मोबाइल वीडियो, सोशल मीडिया पोस्ट, पुलिस वायरलेस संचार, कॉल लॉग, कंट्रोल रूम रिकॉर्ड और ड्यूटी तैनाती से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं।
पहले CJI ने जताई थी नाराजगी
इससे पहले अधिवक्ता नरेंद्र मिश्रा ने इसी मामले में मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के समक्ष मौखिक रूप से दिल्ली पुलिस के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई थी। उस दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा था कि केवल एक पत्र के आधार पर अदालत से हस्तक्षेप की मांग करना उचित नहीं है और बिना विधिवत याचिका के अदालत का समय व्यर्थ नहीं किया जाना चाहिए।
सुनवाई के दौरान जब अधिवक्ता ने छात्रों की मांगों और कथित पुलिस कार्रवाई का उल्लेख किया तो CJI ने स्पष्ट किया कि अदालत निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही मामलों पर विचार करेगी। बाद में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी का आशय बिना उचित याचिका के अदालत का समय लेने से था, न कि किसी व्यक्ति विशेष पर टिप्पणी करना।
प्रदर्शन के दौरान हुई थी पुलिस से झड़प
हाल के दिनों में देशभर से आए छात्र और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ता जंतर-मंतर सहित मध्य दिल्ली के कई इलाकों में प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग परीक्षा में कथित पेपर लीक मामलों में जवाबदेही तय करने और तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी।
प्रदर्शन के दौरान जब कुछ समूहों ने संसद की ओर मार्च करने का प्रयास किया, तब दिल्ली पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसी दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की घटनाएं सामने आईं, जिनमें लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के आरोप लगे।
इस्तीफे के बाद समाप्त हुआ आंदोलन
25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद छात्रों का धरना-प्रदर्शन समाप्त हो गया। हालांकि, जंतर-मंतर पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर कानूनी लड़ाई अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुकी है। यदि अदालत इस याचिका पर सुनवाई स्वीकार करती है तो मामले में पुलिस की कार्रवाई और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच को लेकर आगे महत्वपूर्ण कानूनी प्रक्रिया शुरू हो सकती है।