दिवाली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के बाद घर में इस्तेमाल किए गए मिट्टी के दीपक बच जाते हैं। ऐसे में अक्सर लोगों के मन में सवाल होता है कि इन पुराने दीयों का क्या किया जाए। क्या इन्हें अगली दिवाली या किसी दूसरे शुभ अवसर पर दोबारा जलाया जा सकता है या फिर इन्हें किसी पवित्र स्थान पर रखना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस्तेमाल किए जा चुके मिट्टी के दीपकों को दोबारा पूजा में इस्तेमाल करना शुभ नहीं माना जाता है।
KNEWS DESK-साल 2026 में कार्तिक मास की अमावस्या तिथि 8 और 9 नवंबर को पड़ रही है। अमावस्या तिथि की शुरुआत 8 नवंबर को सुबह 11:27 बजे से होगी और इसका समापन 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे होगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, 8 नवंबर की रात प्रदोष काल में मुख्य लक्ष्मी पूजन और दीपावली मनाई जाएगी, जबकि 9 नवंबर को उदयातिथि के अनुसार स्नान, दान और अन्य धार्मिक अनुष्ठान किए जाएंगे।
दिवाली को अंधकार पर प्रकाश की विजय का पर्व माना जाता है। अमावस्या की रात घरों में दीपक जलाकर प्रकाश किया जाता है। मान्यता है कि पूजा में इस्तेमाल किए गए पुराने मिट्टी के दीपकों को दोबारा पूजा में इस्तेमाल करने के बजाय उचित तरीके से अलग कर देना चाहिए। आइए जानते हैं पुराने दीपकों से जुड़ी मान्यताओं और उनके निस्तारण के बारे में।
पुराने मिट्टी के दीपकों का क्या करें?
दिवाली की पूजा के बाद मिट्टी के दीपक अक्सर घर में बच जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एक बार पूजा में इस्तेमाल किए गए मिट्टी के दीपकों को दोबारा पूजा में इस्तेमाल करना शुभ नहीं माना जाता है। मान्यता है कि पूजा के दौरान इस्तेमाल किए गए दीपक नकारात्मक ऊर्जा को अपने भीतर समाहित कर लेते हैं। इसी वजह से पुराने मिट्टी के दीयों को दोबारा पूजा में इस्तेमाल करने से बचने की सलाह दी जाती है। पूजा की परंपराओं में इस्तेमाल की गई सामग्री के सम्मानपूर्वक निस्तारण को भी महत्वपूर्ण माना गया है। इसलिए पुराने मिट्टी के दीपकों को घर में लंबे समय तक रखने के बजाय धार्मिक मान्यता के अनुसार उचित स्थान पर रखना बेहतर माना जाता है।
पीतल और चांदी के दीपक दोबारा कर सकते हैं इस्तेमाल
मिट्टी के दीपकों से अलग पीतल और चांदी जैसे धातु से बने दीपकों को साफ करके दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। धातु के दीपक लंबे समय तक चलते हैं और इन्हें अच्छी तरह साफ करना भी आसान होता है। दिवाली की पूजा के बाद पीतल या चांदी के दीपकों को साफ पानी और उचित सामग्री से अच्छी तरह साफ करके सुखा लें। इसके बाद इन्हें सुरक्षित स्थान पर रखा जा सकता है और अगले किसी शुभ अवसर पर दोबारा पूजा में इस्तेमाल किया जा सकता है। धातु के दीपकों का बार-बार इस्तेमाल करना पूजा की परंपरा में सामान्य रूप से स्वीकार किया जाता है।
पुराने और खंडित मिट्टी के दीपकों को कहां रखें?
पूजा के बाद अगर मिट्टी के दीपक पुराने या खंडित हो गए हैं, तो उन्हें लेकर भी धार्मिक मान्यताएं बताई गई हैं। मान्यता के अनुसार, ऐसे इस्तेमाल किए गए या टूटे हुए मिट्टी के दीपकों को किसी पवित्र पेड़ के नीचे रखा जा सकता है। इस तरह दीपकों को इधर-उधर फेंकने के बजाय सम्मानपूर्वक अलग किया जा सकता है। हालांकि, ऐसा करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि दीपकों को सार्वजनिक रास्ते, जल स्रोत या ऐसी जगह न रखा जाए जहां किसी को परेशानी हो। धार्मिक आस्था के साथ-साथ स्वच्छता और पर्यावरण का ध्यान रखना भी जरूरी है।
पूजा सामग्री के निस्तारण में रखें इन बातों का ध्यान
दिवाली के बाद बची हुई पूजा सामग्री को इधर-उधर फेंकने के बजाय व्यवस्थित तरीके से अलग करना चाहिए। फूल और पत्तियों जैसी जैविक सामग्री को संभव हो तो खाद बनाने या अन्य उचित तरीके से निस्तारित किया जा सकता है। वहीं धातु की पूजा सामग्री को साफ करके सुरक्षित रखा जा सकता है।
इस तरह दिवाली के बाद पूजा सामग्री का सम्मानपूर्वक निस्तारण करने के साथ घर और आसपास की साफ-सफाई भी बनाए रखी जा सकती है। धार्मिक परंपराओं के साथ स्वच्छता और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाना भी जरूरी है।