World Osteoporosis Day: घंटों रील्स देखने की आदत रीढ़ की हड्डी को कैसे पहुंचाती है नुकसान? एक्सपर्ट से समझें

Knews Desk- 20 अक्टूबर को वर्ल्ड ऑस्टियोपोरोसिस डे मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य लोगों को हड्डियों की सेहत और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियों के प्रति जागरूक करना है। आजकल सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक मोबाइल पर रील्स देखने की आदत आम हो गई है। लोग इंस्टाग्राम रील्स, यूट्यूब शॉर्ट्स और दूसरी छोटी वीडियो स्क्रॉल करते हुए घंटों बिता देते हैं। इसका असर केवल आंखों और मानसिक स्वास्थ्य पर ही नहीं, बल्कि गर्दन, पीठ और मांसपेशियों की सेहत पर भी पड़ सकता है। लंबे समय तक गलत मुद्रा में बैठकर मोबाइल देखने से रीढ़ की हड्डी पर दबाव बढ़ सकता है।ऑस्टियोपोरोसिस हड्डियों से जुड़ी एक बीमारी है, जिसमें हड्डियां कमजोर और अधिक नाजुक हो जाती हैं। ऐसी स्थिति में मामूली गिरने या हल्की चोट लगने पर भी फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है। हड्डियों को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित खानपान, पर्याप्त शारीरिक गतिविधि और सही जीवनशैली जरूरी है। हालांकि, मोबाइल पर घंटों रील्स देखना सीधे तौर पर ऑस्टियोपोरोसिस का कारण नहीं है, लेकिन इसके चलते शारीरिक गतिविधियां कम होने से सेहत पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

यशोदा मेडिसिटी, इंदिरापुरम के न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रिंसिपल कंसल्टेंट डॉक्टर गौरव बत्रा के मुताबिक, रील्स, यूट्यूब शॉर्ट्स और दूसरी छोटी वीडियो देखने के दौरान लोग अक्सर लंबे समय तक मोबाइल पर स्क्रॉल करते रहते हैं। इस दौरान उनकी गर्दन झुकी रहती है और पीठ भी आगे की ओर मुड़ी होती है। लगातार इस मुद्रा में रहने से गर्दन की मांसपेशियों और रीढ़ पर दबाव बढ़ सकता है। इससे गर्दन में दर्द, अकड़न, कंधों में परेशानी और पीठ के ऊपरी हिस्से में दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लंबे समय तक गर्दन झुकाकर मोबाइल देखने से होने वाली इस तरह की परेशानी को आमतौर पर टेक्स्ट नेक कहा जाता है।

रील्स देखने की आदत का एक अन्य नुकसान यह है कि लोग लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहते हैं और उनकी शारीरिक गतिविधियां कम हो जाती हैं। नियमित रूप से चलने-फिरने और व्यायाम नहीं करने से मांसपेशियों में थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है। इसके अलावा, लगातार बैठे रहने से पीठ में दर्द और शरीर में अकड़न की परेशानी भी बढ़ सकती है। मोबाइल का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल नींद की दिनचर्या को प्रभावित कर सकता है। पर्याप्त नींद नहीं मिलने और शारीरिक गतिविधियों की कमी का असर भी संपूर्ण स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।

डॉक्टर गौरव बत्रा के मुताबिक, मोबाइल इस्तेमाल करते समय कुछ सावधानियां बरतकर गर्दन और पीठ पर पड़ने वाले दबाव को कम किया जा सकता है। मोबाइल को आंखों के स्तर पर रखने की कोशिश करें, ताकि गर्दन को लगातार नीचे झुकाना न पड़े। लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठने के बजाय बीच-बीच में ब्रेक लें और गर्दन व कंधों की हल्की एक्सरसाइज करें। इसके अलावा, नियमित रूप से टहलना, शारीरिक गतिविधियां करना और बैठने की मुद्रा सही रखना भी जरूरी है। रील्स देखने के लिए समय निर्धारित करें, ताकि मोबाइल का इस्तेमाल आपकी नींद और रोजमर्रा की गतिविधियों को प्रभावित न करे।अगर गर्दन या पीठ में लगातार दर्द, झनझनाहट, सुन्नपन या कमजोरी महसूस होती है, तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। वर्ल्ड ऑस्टियोपोरोसिस डे हमें याद दिलाता है कि हड्डियों की सेहत को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। मोबाइल का सीमित इस्तेमाल, सही मुद्रा, संतुलित खानपान और सक्रिय जीवनशैली रीढ़ की हड्डी तथा मांसपेशियों को स्वस्थ रखने में मदद कर सकती है।

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