Knews Desk– कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के बीच सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नागरिकों को प्रदर्शन करने का अधिकार है, लेकिन इसका तरीका पुलिस एक्ट और कानून के अनुरूप होना चाहिए। कोर्ट ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की गैरकानूनी हिरासत पर रोक लगाने और दिल्ली में मेट्रो सेवाएं सामान्य रखने के निर्देश भी दिए।
सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को विशेष सुनवाई के दौरान कहा कि मौलिक अधिकारों का इस्तेमाल कानून में तय प्रक्रिया से अलग नहीं किया जा सकता। अदालत ने केंद्र को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि दिल्ली मेट्रो सामान्य समय-सारिणी के अनुसार चले और इंटरनेट सेवाएं बाधित न हों। जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें CJP के प्रदर्शन के कारण दिल्ली में मेट्रो और ट्रेन सेवाओं पर पूरी तरह रोक नहीं लगाने संबंधी पूर्व आदेश के कथित उल्लंघन पर अवमानना कार्यवाही शुरू करने की मांग की गई थी। कोर्ट ने कहा कि पहली नजर में अवमानना का मामला बनता है।
पीठ ने केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार और दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) की चेयरपर्सन को नोटिस जारी कर 13 अक्टूबर 2026 तक जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। इसमें पूर्व आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट भी शामिल करने को कहा गया। हालांकि, फिलहाल संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से यह सुनिश्चित करने को कहा कि वकीलों, पत्रकारों और अन्य लोगों को अपने पेशेवर दायित्व निभाने में बाधा न आए। अदालत ने स्पष्ट किया कि इंटरनेट सेवाएं निर्बाध रखने के निर्देश का मतलब सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत मिली शक्तियों को समाप्त करना नहीं है।
पीठ ने यह भी कहा कि कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अलावा किसी को गैरकानूनी रूप से हिरासत में नहीं लिया जाना चाहिए। विशेष रूप से उन लोगों के मामले में, जो उस क्षेत्र से बाहर एकत्र हों जहां भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू की गई है।