बेगूसराय में गंगा स्नान के दौरान डूबे अंकित कुमार (20) और शिवम कुमार (19) का एक सप्ताह बाद भी पता नहीं चल सका। अपने बेटों के शव नहीं मिलने से टूट चुके परिवारों ने परंपरा के अनुसार कुश के पुतले बनाकर उनका अंतिम संस्कार किया।
Knews Desk– बिहार के बेगूसराय में दो जिगरी दोस्तों की दर्दनाक घटना से उनके परिवारों में मातम पसरा हुआ है। गढ़हरा गोढ़ियारी टोला के रहने वाले अंकित कुमार और शिवम कुमार जिउतिया पर्व के दिन गंगा स्नान के दौरान तेज बहाव में बह गए थे। दोनों सिमरिया भोला घाट पर नहाने के लिए नदी में उतरे थे, लेकिन अचानक गहरे पानी में फंसने के बाद लापता हो गए। हादसे के सात दिन बीत जाने के बाद भी दोनों का कोई पता नहीं चल सका। आखिरकार परिवारों ने शुक्रवार को कुश से उनके पुतले तैयार कर अंतिम संस्कार किया।
अंकित और शिवम की दोस्ती पूरे गांव में मशहूर थी। अंकित गढ़हरा वार्ड नंबर-16 निवासी राम प्रताप सहनी का इकलौता बेटा था, जबकि शिवम बिरजू राम का पुत्र था। दोनों के घरों के बीच महज सौ मीटर की दूरी थी। तेयाय कॉलेज में बीए द्वितीय खंड में पढ़ने वाले दोनों दोस्त पिछले दो वर्षों से सेना और पुलिस में भर्ती होने की तैयारी कर रहे थे। वे रोज सुबह जल्दी उठकर व्यायाम करते और गंगा किनारे दौड़ लगाकर अपने सपनों को पूरा करने के लिए मेहनत करते थे।
घटना वाले दिन दोनों साइकिल से सिमरिया भोला घाट पहुंचे थे। व्यायाम और दौड़ लगाने के बाद वे गंगा में स्नान करने उतरे। इसी दौरान नदी की तेज धारा ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। बताया गया कि एक दोस्त को डूबता देखकर दूसरे ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन दोनों ही पानी में समा गए। घाट पर उनकी साइकिलें, कपड़े, चप्पलें और मोबाइल फोन रह गए। शिवम के मोबाइल से मुंबई में रहने वाले एक रिश्तेदार के पास फोन पहुंचने के बाद परिवारों को हादसे की जानकारी मिली। इसके बाद दोनों घरों में चीख-पुकार मच गई।
दोनों युवकों की तलाश को लेकर परिवारों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों के मुताबिक, हादसे के बाद एनडीआरएफ की टीम बुलाने की मांग की गई थी, लेकिन अधिकारियों ने सीवान में हुए एक अन्य हादसे का हवाला देकर टीम भेजने से इनकार कर दिया। परिवारों का आरोप है कि एसडीआरएफ की टीम भी कुछ दिनों तक तलाश करने के बाद लौट गई। इसके बाद उन्होंने अपने खर्च पर नाव, गोताखोर, जनरेटर और सर्च लाइट की व्यवस्था की।
बेटों की तलाश में परिजन सिमरिया से लेकर लखीसराय, मुंगेर, नवगछिया और भागलपुर तक गंगा के किनारे भटकते रहे। उन्होंने स्थानीय मल्लाहों और दूसरे लोगों से भी मदद मांगी, लेकिन सात दिनों की तलाश के बावजूद दोनों का कोई सुराग नहीं मिला। परिवारों का कहना है कि इस मुश्किल घड़ी में उन्हें प्रशासन की ओर से अपेक्षित मदद और सांत्वना भी नहीं मिली।
शव नहीं मिलने के कारण परिवारों ने धार्मिक परंपरा के अनुसार कुश के पुतले बनाकर अंतिम संस्कार करने का फैसला लिया। शुक्रवार को दोनों पुतलों को नए कपड़े पहनाए गए और अर्थी सजाकर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई। अंकित के पुतले को उसकी छोटी बहन दीपिका ने मुखाग्नि दी, जबकि शिवम के पुतले को उसके छोटे भाई अंशु कुमार ने मुखाग्नि दी। परिजनों के मुताबिक, आगे नखबाल, एकादशा और द्वादशा सहित अन्य धार्मिक रस्में भी इसी विधि से पूरी की जाएंगी।
बीहट नगर परिषद के गढ़हरा गोढ़ियारी टोले में इस घटना के बाद से शोक का माहौल है। जिन दो युवाओं ने देश की सेवा करने और सेना या पुलिस में भर्ती होने का सपना देखा था, उनके परिवार अब उनके लौटने की उम्मीद के टूटने का दर्द झेल रहे हैं। अंकित अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था, जबकि शिवम अपने भाइयों में सबसे बड़ा था। दोनों परिवारों के लिए यह हादसा ऐसा दुख छोड़ गया है, जिसकी भरपाई कर पाना संभव नहीं है।