Knews Desk- लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में नर्सिंग स्टूडेंट्स ने एक बार फिर धरना शुरू कर दिया है। बीएससी नर्सिंग की छात्रा दिव्यांशी यादव की मौत के बाद शुरू हुआ विवाद अब नर्सिंग कॉलेज की प्रिंसिपल के साथ-साथ डीन के खिलाफ कार्रवाई और इस्तीफे की मांग तक पहुंच गया है।
दिव्यांशी यादव की मौत के बाद नर्सिंग स्टूडेंट्स ने लगातार प्रदर्शन किया था। करीब दो दिन चले आंदोलन के बाद कुलपति प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद ने छात्रों से बातचीत की थी और उनकी मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया था। इसके बाद छात्रों ने अपना आंदोलन कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया था। हालांकि, अब छात्रों का आरोप है कि आश्वासन के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
स्टूडेंट्स का कहना है कि केवल मौखिक आश्वासन पर्याप्त नहीं है। उनकी मांग है कि जिम्मेदार अधिकारियों के इस्तीफे लिखित रूप में लिए जाएं। दिव्यांशी यादव की मौत के बाद हुए प्रदर्शन के दौरान नर्सिंग कॉलेज की प्रिंसिपल सूचना राय भौमिक ने अपने पद से इस्तीफा दिया था। लेकिन छात्रों का कहना है कि सिर्फ प्रिंसिपल के इस्तीफे से मामला समाप्त नहीं होता। वे अब नर्सिंग डीन डॉ. अमिता पांडेय मिश्रा के खिलाफ भी कार्रवाई और उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
दिव्यांशी की मौत को लेकर क्या है मामला?
पूरा विवाद बीएससी नर्सिंग की द्वितीय वर्ष की छात्रा दिव्यांशी यादव की मौत के बाद शुरू हुआ था। छात्रों के मुताबिक, दिव्यांशी को 11 सितंबर को तेज बुखार आया था और उसे KGMU की मेडिसिन ओपीडी में ले जाया गया था। छात्रों का दावा है कि 16 सितंबर को उसकी डेंगू की जांच रिपोर्ट पॉजीटिव आई थी, लेकिन इसके बावजूद उसे समय पर छुट्टी नहीं दी गई।
इसके बाद 17 सितंबर को दिव्यांशी के माता-पिता उसे लेकर वाराणसी चले गए। वहां इलाज के दौरान 19 सितंबर को उसकी मौत हो गई। हालांकि, KGMU प्रशासन ने छात्रों के आरोपों से अलग पक्ष रखा है। विश्वविद्यालय के प्रवक्ता के मुताबिक, दिव्यांशी की जांच और इलाज कराया गया था और पूरे मामले की जांच की जा रही है।
बीमार छात्रों से ड्यूटी कराने का भी आरोप
दिव्यांशी की मौत के बाद नर्सिंग स्टूडेंट्स ने हॉस्टल और छात्रों की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए हैं। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि हॉस्टल में कई छात्र बीमार हैं, इसके बावजूद उनसे वार्ड में ड्यूटी कराई जा रही है।
छात्रों का यह भी दावा है कि स्वास्थ्य संबंधी शिकायतों को पहले गंभीरता से नहीं लिया गया। इन्हीं आरोपों को लेकर अब प्रदर्शनकारी छात्र जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। फिलहाल KGMU में नर्सिंग स्टूडेंट्स का धरना दोबारा शुरू होने से मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।