भारतीय सेना के स्वदेशी जोरावर Light Tank कार्यक्रम में सुरक्षा यानी आर्मर को लेकर बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है। सूत्रों के मुताबिक, पहली खेप के 59 टैंकों को दो अलग-अलग कॉन्फिगरेशन में तैयार करने के विकल्प पर विचार किया जा रहा है। संभावित योजना के तहत 18 और 41 टैंकों का विभाजन किया जा सकता है। हालांकि, इस संख्या और विभाजन की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
Knews Desk – करीब 25 टन वजन वाले जोरावर लाइट टैंक को खास तौर पर ऊंचाई वाले इलाकों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में ऑपरेशन के लिए तैयार किया जा रहा है। इसका प्रमुख उद्देश्य लद्दाख में LAC जैसे इलाकों में भारतीय सेना को ऐसी क्षमता उपलब्ध कराना है, जिसे भारी टैंकों की तुलना में आसानी से ऑपरेट और तैनात किया जा सके।
सेना को चाहिए ज्यादा मजबूत कवच
जोरावर के मूल डिजाइन में फ्रंटल प्रोटेक्शन को STANAG 4569 Level-4 के आसपास बताया गया है। अब सेना की ओर से इसकी सुरक्षा को बढ़ाकर Level-6 तक ले जाने की मांग सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, यह स्तर 30mm APFSDS जैसे खतरों से सुरक्षा देने के लिए बनाया जाता है।
हालांकि, आर्मर बढ़ाने के साथ टैंक का वजन भी बढ़ेगा। वजन बढ़ने की स्थिति में इंजन और पावर पैक को अपग्रेड करने की जरूरत पड़ सकती है। इसका असर टैंक की मोबिलिटी, ट्रायल और इंडक्शन की टाइमलाइन पर पड़ सकता है।
59 टैंकों में क्या होगा बदलाव?
सूत्रों के मुताबिक, एक विकल्प यह है कि शुरुआती टैंकों को करीब 25 टन वाले मूल डिजाइन के आसपास रखा जाए, जबकि बाद के टैंकों में ज्यादा आर्मर के साथ जरूरत के मुताबिक ज्यादा ताकतवर पावर पैक दिया जाए।
इसी के तहत शुरुआती 59 टैंकों को दो अलग-अलग कॉन्फिगरेशन में बांटने की बात सामने आई है। संभावित तौर पर 18 टैंक पहले कॉन्फिगरेशन और 41 टैंक अपग्रेडेड कॉन्फिगरेशन में हो सकते हैं। हालांकि, यह जानकारी फिलहाल सूत्रों पर आधारित है और इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
सेना को 354 जोरावर की जरूरत
भारतीय सेना को कुल 354 लाइट टैंकों की जरूरत है। इनमें शुरुआती 59 टैंक DRDO और L&T मिलकर विकसित कर रहे हैं। बाकी 295 टैंकों के लिए Make-I प्रक्रिया के तहत निजी कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया चल रही है।
जोरावर में 105mm मुख्य तोप के साथ आधुनिक निगरानी, संचार और युद्धक्षेत्र की स्थिति की जानकारी देने वाली क्षमताएं शामिल हैं। इसे खास तौर पर हाई-एल्टीट्यूड ऑपरेशन के लिए डिजाइन किया गया है।
चीन के Type-15 से मुकाबले की क्षमता
जोरावर के विकास के पीछे पूर्वी लद्दाख और दूसरे ऊंचाई वाले इलाकों में भारतीय सेना की जरूरत एक अहम कारण है। चीन के पास Type-15/ZTQ-15 लाइट टैंक पहले से मौजूद है।
ऐसे इलाकों में हल्के टैंकों की बेहतर मोबिलिटी महत्वपूर्ण मानी जाती है। जोरावर को इसी जरूरत के तहत कम वजन और बेहतर पावर-टू-वेट रेशियो के साथ विकसित किया जा रहा है।
2028-29 में इंडक्शन की उम्मीद
सेना के सूत्रों के मुताबिक, जोरावर का इंडक्शन 2028-29 के दौरान होने की उम्मीद है। इसके लिए ट्रायल, यूजर इवैल्यूएशन और उत्पादन की तैयारियों का सफल होना जरूरी होगा।
अब जोरावर कार्यक्रम में सुरक्षा और मोबिलिटी के बीच संतुलन अहम मुद्दा बन गया है। ज्यादा आर्मर से टैंक की सुरक्षा बढ़ सकती है, लेकिन इसके साथ वजन बढ़ने की चुनौती भी सामने आएगी। यही संतुलन आगे जोरावर की कॉन्फिगरेशन तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।