KNEWS DESK- हैदराबाद में फिल्म शुरू होने से पहले 17 मिनट तक विज्ञापन और ट्रेलर दिखाना PVR सिनेमाज को भारी पड़ गया। एक वकील की शिकायत पर जिला कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन ने PVR को कुल 75,000 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। शिकायतकर्ता के मुताबिक, फिल्म में हुई देरी के कारण वह तय समय से करीब एक घंटे देर से घर पहुंचा।
वकील ने रात 10:35 बजे शुरू होने वाले शो के लिए दो टिकट बुक किए थे। वह समय पर सिनेमा हॉल पहुंचकर अपनी सीट पर बैठ गया, लेकिन तय समय पर फिल्म शुरू होने के बजाय स्क्रीन पर विज्ञापन और ट्रेलर चलते रहे। फिल्म करीब 17 मिनट की देरी से शुरू हुई। इसके चलते वह रात 2 बजे के बजाय करीब 3 बजे घर पहुंचा। उन्होंने इसे सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि उपभोक्ता सेवा में कमी बताते हुए शिकायत दर्ज कराई।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि PVR फिल्म शुरू होने से पहले तय सीमा से अधिक समय तक कमर्शियल विज्ञापन दिखा रहा था। उन्होंने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के नियमों का हवाला देते हुए मुआवजे और मुकदमेबाजी के खर्च की मांग की।
PVR ने अपने बचाव में कहा कि विज्ञापन, ट्रेलर और जनसेवा से जुड़े कंटेंट दिखाना उसके कारोबार का हिस्सा है। कंपनी ने संविधान के अनुच्छेद 19(1)(g) और सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले का भी हवाला दिया। PVR का कहना था कि दिखाया गया कंटेंट साक्षरता, कृषि, महिला कल्याण और स्वच्छता जैसे जनहित के मुद्दों से जुड़ा था।
आयोग ने PVR की दलील को स्वीकार नहीं किया। आयोग ने मंत्रालय के मेमोरेंडम का हवाला देते हुए कहा कि स्वीकृत पब्लिक सर्विस फिल्मों की अवधि अधिकतम दो मिनट होनी चाहिए और उन्हें फिल्म शुरू होने से दस मिनट पहले या इंटरवल में दिखाया जाना चाहिए।
आयोग ने PVR को असुविधा के लिए 20,000 रुपये, मुकदमेबाजी के खर्च के लिए 5,000 रुपये और दंडात्मक हर्जाने के तौर पर 50,000 रुपये देने का आदेश दिया। कुल 75,000 रुपये की राशि जिला उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा कराने को कहा गया। साथ ही, PVR को भविष्य में ऐसी गतिविधियां रोकने का निर्देश दिया गया।