FSSAI स्कूलों के आसपास हाई फैट, हाई शुगर और हाई सॉल्ट यानी HFSS खाद्य पदार्थों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। प्रस्ताव लागू होने पर स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में चिप्स, कोल्ड ड्रिंक, चॉकलेट समेत कई जंक फूड की बिक्री पर रोक लग सकती है।
Knews Desk– स्कूल की छुट्टी होते ही बच्चों का रुख अक्सर कैंटीन या आसपास मौजूद दुकानों और ठेलों की तरफ हो जाता है। चिप्स, नमकीन, कोल्ड ड्रिंक, चॉकलेट, बर्गर, पिज्जा और समोसे जैसे खाद्य पदार्थ बच्चों के बीच काफी लोकप्रिय हैं। हालांकि, अब स्कूलों के आसपास इन खाद्य पदार्थों की उपलब्धता को सीमित करने की तैयारी की जा रही है।
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी FSSAI स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में ज्यादा वसा, चीनी और नमक वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। इसका उद्देश्य बच्चों की ऐसे खाद्य पदार्थों तक आसान पहुंच को कम करना और कम उम्र से ही स्वस्थ खान-पान की आदतों को बढ़ावा देना है।
प्रस्तावित नीति के तहत स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में ऐसी दुकानों, ठेलों और अन्य खाद्य विक्रेताओं पर रोक लग सकती है, जहां HFSS यानी हाई फैट, हाई शुगर और हाई सॉल्ट वाले खाद्य पदार्थ बेचे जाते हैं। इसमें चिप्स, नमकीन स्नैक्स, मीठे पेय, चॉकलेट, बर्गर, पिज्जा, नूडल्स और अन्य पैकेज्ड खाद्य पदार्थ शामिल हो सकते हैं।
FSSAI के 2026 के मसौदे में ठोस खाद्य पदार्थों में वसा, अतिरिक्त चीनी और नमक की तय सीमा का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, ऐसे खाद्य पदार्थ जो HFSS श्रेणी में नहीं आते हैं, उनकी बिक्री की अनुमति जारी रह सकती है। प्रस्ताव का उद्देश्य बच्चों को अस्वास्थ्यकर भोजन से दूर रखने के साथ-साथ उनके आसपास पौष्टिक और बेहतर खाद्य विकल्पों की उपलब्धता बढ़ाना है।
बच्चों में बढ़ते मोटापे को भी इस प्रस्ताव की एक बड़ी वजह माना जा रहा है। विश्व मोटापा महासंघ द्वारा उद्धृत आंकड़ों के अनुसार, भारत में 5 से 19 वर्ष की उम्र के अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त बच्चों की संख्या 2015 में करीब 2.8 करोड़ थी, जो 2025 में बढ़कर 4.1 करोड़ हो गई। अनुमान है कि 2040 तक यह संख्या करीब 5.6 करोड़ तक पहुंच सकती है।
सस्ते पैकेटबंद खाद्य पदार्थों और फास्ट फूड की आसान उपलब्धता ने भी बच्चों की खान-पान की आदतों को लेकर चिंता बढ़ाई है। आकर्षक विज्ञापन, कम कीमत और आसानी से उपलब्ध होने के कारण पैकेटबंद स्नैक्स, चॉकलेट और मीठे पेय पदार्थ बच्चों और युवाओं के बीच लोकप्रिय बने हुए हैं।
FSSAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजित पुनहानी के मुताबिक, प्रस्तावित कदम का मकसद बच्चों के बीच स्वस्थ खान-पान की आदतों को बढ़ावा देना है। इसके अलावा ऐसे नियम खाद्य कंपनियों को अपने उत्पादों में इस्तेमाल होने वाली चीनी, नमक और वसा की मात्रा पर दोबारा विचार करने के लिए भी प्रेरित कर सकते हैं।
हालांकि, इस प्रस्ताव का असर स्कूलों के आसपास कारोबार करने वाले छोटे दुकानदारों, ठेले वालों, रेस्तरां और किराना दुकानों पर पड़ सकता है। इन जगहों पर आमतौर पर कोल्ड ड्रिंक, चिप्स, चॉकलेट, बर्गर, पिज्जा और समोसे जैसे उत्पाद बेचे जाते हैं। नियम लागू होने की स्थिति में इन उत्पादों की बिक्री सीमित हो सकती है, जिससे स्थानीय कारोबारियों की आय प्रभावित होने की आशंका है। विक्रेताओं को अपने उत्पादों में बदलाव कर ऐसे विकल्प उपलब्ध कराने पड़ सकते हैं, जो HFSS श्रेणी में नहीं आते।
दूसरे देशों में भी बच्चों को अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों से दूर रखने के लिए कदम उठाए गए हैं। चिली में स्कूलों के आसपास अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों की उपलब्धता और उनके प्रचार को नियंत्रित करने के लिए नियम लागू किए गए हैं।
अगर भारत में स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में HFSS खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक का प्रस्ताव लागू होता है, तो इससे स्कूलों के अंदर और आसपास बच्चों की हाई फैट, हाई शुगर और हाई सॉल्ट वाले खाद्य पदार्थों तक पहुंच को नियंत्रित करने की व्यवस्था में बड़ा बदलाव हो सकता है।