Knews Desk– उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ समाजवादी नेता राम गोविंद चौधरी का शुक्रवार को लखनऊ के पीजीआई में निधन हो गया। वह 74 वर्ष के थे। छात्र राजनीति से अपना सफर शुरू करने वाले चौधरी आठ बार विधायक रहे और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री के साथ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी भी संभाली।
राम गोविंद चौधरी का राजनीतिक जीवन जेपी आंदोलन से जुड़ा रहा। बलिया के मुरली मनोहर टाउन कॉलेज में छात्र राजनीति के दौरान वह छात्रसंघ के महामंत्री और बाद में अध्यक्ष बने। आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई में सक्रिय रहने के कारण उन्हें जेल भी जाना पड़ा।
उनके जीवन का एक चर्चित प्रसंग जेल से रिहाई के समय का है। करीब 19 महीने जेल में रहने के बाद जब उनकी रिहाई हुई, उसी दिन चंद्रशेखर लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन करने जा रहे थे। राम गोविंद चौधरी के जेल से बाहर निकलने की खबर के बाद बड़ी संख्या में लोग उनके साथ हो लिए। बलिया जेल से टीडी कॉलेज तक लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी और शहर में जाम जैसी स्थिति बन गई। इसी दौरान चंद्रशेखर का काफिला वहां पहुंचा। भीड़ देखकर उन्होंने काफिला रुकवाया और राम गोविंद चौधरी से मिलने के लिए संदेश भेजा।
यही मुलाकात आगे चलकर दोनों के बीच राजनीतिक और आत्मीय संबंधों की शुरुआत बनी। वर्ष 1977 में राम गोविंद चौधरी पहली बार चिलकहर विधानसभा सीट से जनता पार्टी के टिकट पर विधायक बने। इसके बाद उन्होंने कई बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। बाद में बांसडीह उनकी प्रमुख राजनीतिक कर्मभूमि बनी।
मुलायम सिंह यादव की सरकार में राम गोविंद चौधरी मंत्री रहे। वर्ष 2012 में अखिलेश यादव सरकार में उन्हें बेसिक शिक्षा और बाल विकास एवं पुष्टाहार जैसे विभागों की जिम्मेदारी मिली। 2017 में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद उन्हें उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाया गया।
राम गोविंद चौधरी की पहचान लंबे समय तक बलिया की जमीन से जुड़े समाजवादी नेता के तौर पर रही। छात्र राजनीति से शुरू हुआ उनका सफर विधानसभा, मंत्री पद और नेता प्रतिपक्ष तक पहुंचा। उनके निधन के बाद बलिया समेत उत्तर प्रदेश के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में उन्हें श्रद्धांजलि दी जा रही है।