Knews Desk – कानपुर की महापौर प्रमिला पांडेय ने मंगल भवन की कमेटी भंग किए जाने के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि नगर निगम की कार्यकारिणी और सदन की मंजूरी के बिना कमेटी को निरस्त किया गया। उन्होंने बताया कि मंगल भवन में अब तक करीब 100 शादियां हो चुकी हैं। उनके मुताबिक, इसके निर्माण और संचालन से जुड़े कामों में नियमों की अनदेखी नहीं की गई और हर काम के लिए कानूनी सलाह ली गई थी।
महापौर ने कहा कि कमेटी को भंग किया जाना उचित नहीं है और वह इस पूरे मामले की शिकायत शासन से करेंगी। उन्होंने अधिकारियों की जवाबदेही पर भी सवाल उठाया और कहा कि अपनी जिम्मेदारी से कोई बच नहीं सकता। महापौर ने कहा कि वह नगर आयुक्त के साथ दोबारा बैठक करेंगी और अधिकारियों से काम करने को कहेंगी।
सड़कों की खराब स्थिति और गड्ढों को लेकर उठ रहे सवालों पर महापौर ने कहा कि नगर निगम में कोई भी काम नगर आयुक्त के हस्ताक्षर के बिना नहीं होता। उन्होंने कहा कि यहां तक कि एक चपरासी के ट्रांसफर का फैसला भी नगर आयुक्त के स्तर से होता है।
15वें वित्त आयोग की कमेटी की अध्यक्ष होने का जिक्र करते हुए महापौर ने कहा कि अगर नगर आयुक्त शहर में गड्ढामुक्त सड़क कराने के लिए अलग बजट मांगते तो उन्हें दिया जाता, लेकिन इस संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी खुद नहीं चाहते कि गड्ढे भरे जाएं। महापौर ने कहा कि अगर किसी अधिकारी के पास ऐसा कोई प्रमाण है कि उन्होंने किसी क्षेत्र में काम नहीं कराने को कहा हो, तो उसे सामने लाया जाए।
अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों को लेकर महापौर ने तीखे अंदाज में कहा कि नगर आयुक्त या कोई भी अधिकारी गंगाजल उठाकर यह कह दे कि मेयर ने कभी किसी क्षेत्र में काम नहीं कराने के लिए कहा था, तो वह खुद को दोषी मानेंगी। उन्होंने कहा कि अगर उन्होंने ऐसा कुछ कहा ही नहीं तो फिर उन्हें दोषी क्यों ठहराया जा रहा है।
महापौर ने अधिकारियों से अपनी जिम्मेदारी निभाने को कहा और संकेत दिया कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर लिखित कार्रवाई भी की जाएगी। नगर निगम मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने अधिकारियों के काम करने के तरीके पर भी सवाल उठाए।
जलभराव के मुद्दे पर महापौर ने मंडलायुक्त और केडीए वीसी से एक विशेष कमेटी बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि शहर के 312 तालाबों को खाली और सुरक्षित कराया जाए, ताकि बारिश का पानी उनमें पहुंचाया जा सके और जलभराव की समस्या को कम किया जा सके। महापौर ने कहा कि जलभराव के लिए अकेले मेयर को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, इस बार अधिक बारिश होने के कारण जलभराव भी ज्यादा हुआ।
महापौर ने अधिकारियों पर कार्यालयों से बाहर नहीं निकलने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें सड़कों पर निकलकर स्थिति देखनी चाहिए और अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जलभराव के समय वह पारिवारिक परिस्थितियों के कारण कानपुर में नहीं थीं। अब अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के लिए लिखित कार्रवाई की जाएगी।
बागी पार्षदों की ओर से क्षेत्र में विकास कार्य नहीं होने के आरोपों पर भी महापौर ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि अगर किसी पार्षद के क्षेत्र में काम नहीं हुआ है तो उन्हें सामने आकर अपनी बात रखनी चाहिए। महापौर के मुताबिक, इन पार्षदों के क्षेत्रों में करोड़ों रुपये के विकास कार्य हुए हैं। किसी क्षेत्र में करीब 9 करोड़, किसी में 10 करोड़ और किसी क्षेत्र में करीब 5 करोड़ रुपये के विकास कार्य होने का उन्होंने दावा किया।
महापौर ने कहा कि सिर्फ महापौर को विकास कार्यों के लिए जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर वह किसी क्षेत्र में काम रोकने के लिए अधिकारियों को निर्देश देती हैं, तो उसे साबित किया जाए। उनके मुताबिक, बिना किसी निर्देश के काम नहीं होने के लिए सिर्फ मेयर को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।