गोवा में SIR को लेकर एक और रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के अधिकारियों ने 7 दिनों के भीतर चुनाव आयोग को 8 ईमेल भेजकर 97 योग्य मतदाताओं के नाम अंतिम सूची में शामिल करने की मांग की, लेकिन तकनीकी और अनुमति से जुड़ी दिक्कतों के कारण इन मतदाताओं के नाम नहीं जोड़े जा सके।
Knews Desk– गोवा में SIR को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने वाली एक और रिपोर्ट सामने आई है। अंग्रेजी अखबार ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, गोवा के अधिकारियों ने 7 दिनों के दौरान चुनाव आयोग को 8 ईमेल भेजे थे। इन ईमेल में 97 ऐसे मतदाताओं की सूची भेजी गई थी, जिन्हें स्थानीय स्तर पर जांच के बाद वोट देने के योग्य पाया गया था। इसके बावजूद इन मतदाताओं के नाम अंतिम SIR सूची में शामिल नहीं हो सके।
यह मामला फरवरी का बताया जा रहा है। 17 फरवरी को गोवा में अंतिम वोटर लिस्ट जारी होने से चार दिन पहले राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी ने दिल्ली स्थित चुनाव आयोग को पत्र भेजा था। यह सात दिनों के भीतर भेजा गया उनका आठवां पत्र था। इसके साथ 97 मतदाताओं की सूची भी भेजी गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, गोवा के EROs ने इन मतदाताओं के दावों और दस्तावेजों की जांच कर उन्हें योग्य पाया था।
अधिकारियों के सामने समस्या यह थी कि पहले हटाए गए इन मतदाताओं के नाम दोबारा शामिल करने के लिए ECINet में जरूरी बदलाव नहीं किया जा सकता था। बताया गया कि इस तरह के फैसलों को बदलने की अनुमति दिल्ली से नियंत्रित होती थी।
‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, जब गोवा के मुख्य चुनाव अधिकारी संजय गोयल से पूछा गया कि योग्य पाए जाने के बावजूद इन मतदाताओं के नाम अंतिम SIR सूची में क्यों नहीं आए, तो उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को उन मामलों की जानकारी दी गई थी, जिन्हें सूची में शामिल किया जाना चाहिए था। उनके मुताबिक, कुछ मामलों में लॉजिकल गड़बड़ियों के कारण मतदाताओं को फ्लैग कर दिया गया था।
संजय गोयल ने यह भी कहा कि नामों को शामिल न करने का फैसला चुनाव आयोग का था, हालांकि ERO स्तर पर मतदाताओं को दोबारा शामिल करने के लिए ECINet में व्यवस्था होनी चाहिए थी।
रिपोर्ट में इन 97 मामलों को उस व्यापक विवाद से भी जोड़ा गया है, जिसमें ECINet, नए मतदाताओं को जोड़ने और मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, दो चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के फैसलों पर 14 बार आपत्ति जताई थी। हालांकि, चुनाव आयोग ने कहा है कि सभी फैसले सामूहिक रूप से और सर्वसम्मति से लिए जाते हैं।
कानूनी प्रक्रिया के मुताबिक, प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची तैयार करने की जिम्मेदारी ERO की होती है। ERO दावों और आपत्तियों की सुनवाई करता है और मतदाताओं के नाम को लेकर फैसला लेता है। जनवरी से देश की मतदाता सूचियां ECINet पर उपलब्ध हैं। चुनाव आयोग ने अपने अलग-अलग सिस्टम को एक प्लेटफॉर्म पर लाने के लिए ECINet शुरू किया है, जबकि रोल मैनेजमेंट के लिए ERONet मॉड्यूल का इस्तेमाल होता है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ERO द्वारा सिस्टम पर किए जा सकने वाले कई कार्यों की अनुमति चुनाव आयोग के IT डिविजन की ओर से तय की जाती है। यही व्यवस्था गोवा के इन 97 मतदाताओं के नाम दोबारा शामिल करने की प्रक्रिया में भी सामने आई।