ईरान ने अमेरिका के सामने रखीं 7 शर्तें, बोला- मानो तो बातचीत, वरना जंग के लिए तैयार

Knews Desk- ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसेन रेजाई के मुताबिक, कतर के माध्यम से ईरान की शर्तें अमेरिका तक पहुंचाई गई हैं। अब तेहरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जवाब का इंतजार कर रहा है। हालांकि, ईरान ने अभी अपनी सभी सात शर्तों को सार्वजनिक नहीं किया है। अब तक सामने आई मांगों में सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करना, ईरान के फ्रीज किए गए फंड को जारी करना और नौसैनिक नाकाबंदी को हटाना शामिल है।रेजाई ने कहा कि अगर अमेरिका इन शर्तों को स्वीकार करता है तो बातचीत का रास्ता खुल सकता है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से दी जा रही धमकियों को बेअसर बताया और कहा कि मांगें नहीं मानी गईं तो ईरान निर्णायक युद्ध के लिए तैयार है। उनके बयान से संकेत मिलता है कि तेहरान बातचीत को संघर्ष समाप्त करने के विकल्प के तौर पर देख रहा है, लेकिन इसके लिए वह पहले अमेरिकी कदम चाहता है।

ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत दोबारा शुरू कराने के लिए कतर और पाकिस्तान भी कूटनीतिक प्रयास कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच बातचीत का एक समझौता पिछले महीने समाप्त हो गया था। इसके बाद क्षेत्र में तनाव बना हुआ है। मौजूदा संघर्ष फरवरी के आखिर में अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान पर किए गए हमलों के बाद शुरू होने की बात कही गई है।इस बीच ईरान ने एक और अमेरिकी हमले की आशंका भी जताई है। रेजाई के अनुसार, ईरान ने अपनी सैन्य तैयारियों में बदलाव किया है और फारस की खाड़ी से लेकर ओमान की खाड़ी और अरब सागर तक अमेरिकी नौसैनिक गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। उन्होंने दावा किया कि ईरान ने हाल में अमेरिकी जहाज या एयरक्राफ्ट कैरियर के पास इस्तेमाल किए जाने की क्षमता वाली कई वारहेड वाली एंटी-शिप मिसाइल का परीक्षण किया है।

रेजाई ने चेतावनी दी कि अगर आगे अमेरिकी हमला होता है तो ईरान की प्रतिक्रिया केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रह सकती। उनके मुताबिक, क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी कारोबार और कंपनियां भी संभावित जवाबी कार्रवाई के दायरे में आ सकती हैं।ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी रेजाई ने अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि ईरान ने फिलहाल परमाणु अप्रसार संधि यानी NPT से बाहर निकलने का फैसला नहीं किया है और उसकी परमाणु नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। उन्होंने धार्मिक आदेश का हवाला देते हुए कहा कि ईरान परमाणु हथियारों के खिलाफ अपनी नीति पर कायम है। हालांकि, उनका कहना है कि अमेरिकी कार्रवाई भविष्य में ईरान को NPT से बाहर निकलने के विकल्प पर विचार करने की दिशा में ले जा सकती है।

वहीं, रेजाई ने बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य को बंद करने की किसी योजना से इनकार किया। उन्होंने इसे यमन और हूती आंदोलन से जुड़ा मुद्दा बताया। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर उन्होंने कहा कि ईरान और ओमान के बीच एक समझौता लगभग तैयार था, लेकिन फिलहाल वह टल गया है।इसी बीच अमेरिकी विदेश विभाग ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल को 18 से 28 सितंबर तक न्यूयॉर्क में होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा की हाई-लेवल वीक में शामिल होने के लिए वीजा जारी किया है। ऐसे में आने वाले दिनों में कूटनीतिक बातचीत और दोनों देशों के बीच तनाव पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *