KNEWS DESK- हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य, पूजा या धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत भगवान गणेश के स्मरण और पूजन से करने की परंपरा है। भगवान गणेश को प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता माना जाता है। इस साल गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर 2026, सोमवार को मनाया जाएगा। इस दिन भक्त घरों और पंडालों में गणपति बप्पा की स्थापना कर उनकी आराधना करेंगे।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर सभी देवी-देवताओं में भगवान गणेश को ही सबसे पहले पूजे जाने का अधिकार कैसे मिला? इसके पीछे पौराणिक कथाओं में एक रोचक प्रसंग बताया गया है।
प्रथम पूज्य बनने के लिए रखी गई थी परीक्षा
पौराणिक मान्यता के अनुसार, एक बार देवताओं के बीच इस बात को लेकर विवाद हो गया कि संसार में सबसे पहले किस देवता की पूजा की जानी चाहिए। जब इस प्रश्न का कोई समाधान नहीं निकला, तो सभी देवता भगवान शिव और माता पार्वती के पास पहुंचे। देवताओं के बीच निर्णय करने के लिए भगवान शिव ने एक प्रतियोगिता रखी। उन्होंने कहा कि जो देवता सबसे पहले पूरे ब्रह्मांड की परिक्रमा करके वापस लौटेगा, वही प्रथम पूज्य कहलाएगा। शर्त सुनते ही सभी देवता अपने-अपने वाहनों पर सवार होकर निकल पड़े। भगवान कार्तिकेय भी अपने तेज गति वाले मयूर पर सवार होकर ब्रह्मांड की परिक्रमा के लिए रवाना हो गए।
गणेश जी ने बुद्धि से जीती प्रतियोगिता
भगवान गणेश का वाहन मूषक था, इसलिए उनके लिए सभी देवताओं की तरह तेजी से ब्रह्मांड की परिक्रमा करना आसान नहीं था। लेकिन गणपति ने अपनी बुद्धि का इस्तेमाल किया। वे कहीं बाहर जाने के बजाय अपने माता-पिता भगवान शिव और माता पार्वती के पास पहुंचे। उन्होंने दोनों को एक स्थान पर बैठाया और श्रद्धा के साथ उनकी सात बार परिक्रमा की। इसके बाद गणेश जी ने भगवान शिव से कहा कि उनके लिए माता-पिता ही पूरा संसार हैं। माता-पिता के चरणों में ही सभी तीर्थों और समस्त जगत का सार माना गया है। इसलिए उन्होंने अपने माता-पिता की परिक्रमा को ही ब्रह्मांड की परिक्रमा के समान माना।
शिव-पार्वती ने दिया प्रथम पूज्य होने का वरदान
गणेश जी की बुद्धिमत्ता और माता-पिता के प्रति उनकी श्रद्धा देखकर भगवान शिव और माता पार्वती बेहद प्रसन्न हुए। भगवान शिव ने गणेश जी को आशीर्वाद देते हुए उन्हें प्रथम पूज्य होने का वरदान दिया। मान्यता है कि तभी से किसी भी शुभ या मांगलिक कार्य की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा से करने की परंपरा चली आ रही है। उन्हें विघ्नहर्ता भी कहा जाता है, इसलिए भक्त किसी भी नए काम से पहले उनका आशीर्वाद लेते हैं ताकि कार्य में आने वाली बाधाएं दूर हों और सफलता प्राप्त हो। यही वजह है कि गणेश चतुर्थी के अवसर पर भी सबसे पहले गणपति बप्पा का आह्वान किया जाता है। भक्त श्रद्धा से उनकी स्थापना करते हैं और सुख-समृद्धि, बुद्धि तथा कार्यों की सफलता की कामना करते हैं।