स्टारलिंक-जियो समेत कंपनियों के लिए सैटेलाइट इंटरनेट का रास्ता आसान, स्पेक्ट्रम आवंटन पर मिली मंजूरी
Knews Desk – भारत में सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवाओं की शुरुआत की दिशा में सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। स्टारलिंक, वनवेब और रिलायंस जियो जैसी कंपनियों को सैटेलाइट के जरिए इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराने के लिए स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ गई है। सूत्रों के मुताबिक, सचिवों के समूह ने इस संबंध में भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) की सिफारिशों को मंजूरी दे दी है।
हालांकि, इस प्रस्ताव को लागू करने से पहले केंद्रीय कैबिनेट की अंतिम मंजूरी जरूरी होगी। इससे पहले पिछले सप्ताह डिजिटल कम्युनिकेशन कमीशन की बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी। प्रस्ताव के तहत सैटेलाइट ब्रॉडबैंड कंपनियों को पांच साल की अवधि के लिए स्पेक्ट्रम आवंटित किया जा सकता है। इसके बदले कंपनियों को अपने एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) का 5 फीसदी स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज (SUC) के तौर पर देना होगा।
सरकार सैटेलाइट इंटरनेट को ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों तक पहुंचाने पर भी जोर दे रही है। ऐसे क्षेत्रों में सेवाएं उपलब्ध कराने वाली कंपनियों के लिए स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज कम रखने का प्रावधान किया जा सकता है। इससे उन इलाकों में हाई-स्पीड इंटरनेट की पहुंच बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है, जहां पारंपरिक नेटवर्क पहुंचाना मुश्किल है।
स्टारलिंक और जियो समेत कंपनियों को फायदा
स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रक्रिया को मंजूरी मिलने से एलन मस्क की स्टारलिंक, वनवेब और रिलायंस जियो जैसी कंपनियों के लिए भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू करने की राह आसान हो सकती है। अंतिम फैसला कैबिनेट की मंजूरी के बाद होगा।
सैटेलाइट ब्रॉडबैंड के विस्तार से खासतौर पर पहाड़ी, ग्रामीण और ऐसे दूरदराज के इलाकों को फायदा मिलने की उम्मीद है, जहां मोबाइल टावर या फाइबर नेटवर्क पहुंचाना चुनौतीपूर्ण है। भारत में सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवाओं की शुरुआत की दिशा में सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। स्टारलिंक, वनवेब और रिलायंस जियो जैसी कंपनियों को सैटेलाइट के जरिए इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराने के लिए स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ गई है। सूत्रों के मुताबिक, सचिवों के समूह ने इस संबंध में भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) की सिफारिशों को मंजूरी दे दी है।
हालांकि, इस प्रस्ताव को लागू करने से पहले केंद्रीय कैबिनेट की अंतिम मंजूरी जरूरी होगी। इससे पहले पिछले सप्ताह डिजिटल कम्युनिकेशन कमीशन की बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी।
5 साल के लिए मिलेगा स्पेक्ट्रम
प्रस्ताव के तहत सैटेलाइट ब्रॉडबैंड कंपनियों को पांच साल की अवधि के लिए स्पेक्ट्रम आवंटित किया जा सकता है। इसके बदले कंपनियों को अपने एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) का 5 फीसदी स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज (SUC) के तौर पर देना होगा।
सरकार सैटेलाइट इंटरनेट को ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों तक पहुंचाने पर भी जोर दे रही है। ऐसे क्षेत्रों में सेवाएं उपलब्ध कराने वाली कंपनियों के लिए स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज कम रखने का प्रावधान किया जा सकता है। इससे उन इलाकों में हाई-स्पीड इंटरनेट की पहुंच बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है, जहां पारंपरिक नेटवर्क पहुंचाना मुश्किल है।
स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रक्रिया को मंजूरी मिलने से एलन मस्क की स्टारलिंक, वनवेब और रिलायंस जियो जैसी कंपनियों के लिए भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू करने की राह आसान हो सकती है। अंतिम फैसला कैबिनेट की मंजूरी के बाद होगा।
सैटेलाइट ब्रॉडबैंड के विस्तार से खासतौर पर पहाड़ी, ग्रामीण और ऐसे दूरदराज के इलाकों को फायदा मिलने की उम्मीद है, जहां मोबाइल टावर या फाइबर नेटवर्क पहुंचाना चुनौतीपूर्ण है।