बिना RTE-NCTE-UGC योग्यता नहीं मिलेगी शिक्षक की नौकरी, सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश

Knews Desk – शिक्षक भर्ती को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा अंतरिम आदेश जारी किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जिन उम्मीदवारों के पास RTE, NCTE या UGC एक्ट के तहत निर्धारित जरूरी योग्यता नहीं है, उन्हें स्कूलों या कॉलेजों में शिक्षक के तौर पर नियुक्त नहीं किया जा सकता। यह आदेश CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया है।सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम उपाय के तौर पर कहा कि किसी भी शिक्षक को स्कूल या कॉलेज में तब तक नियुक्त या काम पर नहीं रखा जाएगा, जब तक उसके पास संबंधित कानून के तहत निर्धारित आवश्यक योग्यता मौजूद न हो। इस मामले में कोर्ट ने केंद्र सरकार, राज्यों और UGC को नोटिस भी जारी किया है।

यह मामला राजेश चौहान की ओर से दायर जनहित याचिका से जुड़ा है। याचिका में ऐसी कानूनी व्यवस्था को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई थी, जिसके तहत निजी या अस्थायी शिक्षण संस्थानों में काम करने वाले शिक्षकों और कर्मचारियों को बिना निष्पक्ष, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी भर्ती प्रक्रिया के सीधे सरकारी सेवा में शामिल करने की अनुमति दी जाती है।सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से उन शिक्षकों की नौकरी पर असर पड़ सकता है, जिनके पास शिक्षक पद के लिए निर्धारित जरूरी योग्यता नहीं है। हालांकि, इस मामले में आगे की सुनवाई और कोर्ट के अंतिम फैसले के बाद स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।

RTE यानी राइट टू एजुकेशन एक्ट की धारा 23 के तहत शिक्षक पद के लिए न्यूनतम योग्यता निर्धारित करने की जिम्मेदारी NCTE को दी गई है। स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए संबंधित शैक्षणिक योग्यता के साथ Teacher Eligibility Test यानी TET जैसी आवश्यकताओं का पालन करना होता है।NCTE के नियमों के अनुसार प्राथमिक स्तर पर शिक्षक बनने के लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यता और शिक्षक प्रशिक्षण जरूरी होता है। वहीं, उच्च कक्षाओं के लिए संबंधित विषय में ग्रेजुएशन या पोस्ट ग्रेजुएशन के साथ B.Ed जैसी योग्यता आवश्यक हो सकती है। भर्ती के नियम संबंधित पद और स्तर के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।

इसी तरह कॉलेज और यूनिवर्सिटी में शिक्षकों की पात्रता का निर्धारण UGC के नियमों के तहत होता है। असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए आम तौर पर संबंधित विषय में निर्धारित अंकों के साथ मास्टर डिग्री और UGC NET या संबंधित पात्रता परीक्षा जैसी शर्तें लागू होती हैं। कुछ मामलों में PhD धारकों के लिए नियमों के अनुसार NET से छूट का प्रावधान भी है।फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश ने शिक्षक भर्ती में निर्धारित शैक्षणिक और पेशेवर योग्यता के पालन को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। अब केंद्र, राज्य सरकारों और UGC के जवाब के बाद इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और कोर्ट के अंतिम रुख पर सभी की नजर रहेगी।

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