जनता रही रो,अधिकारी रहे सो !

उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड में इन दिनों मानसून सक्रिय नजर आ रहा है। हर बार की तरह इस बार भी मानसून प्रदेश के लिए एक बड़ी चुनौती बनता दिखाई दे रहा है। पर्वतीय इलाकों में भूस्खलन से जनजीवन प्रभावित है तो वहीं मैदानी क्षेत्रों में जलभराव की समस्या से आमजन परेशान है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में भी मानसून के सक्रिय बने रहने के आसार हैं, ऐसे में बारिश के कारण उत्पन्न होने वाली समस्याएं आने वाले समय में और चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं। हालांकि सरकार की ओर से अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि बारिश कम होते ही सड़कों के पुनर्निर्माण का कार्य तेज किया जाए और सड़कों को गड्ढामुक्त किया जाए। इसके साथ ही धामी सरकार की ओर से अवैध अतिक्रमण के खिलाफ भी कार्रवाई जारी है। बारिश के चलते जहाँ आमजन जलभराव, सड़को पर गड्ढों जैसी समस्याओं से जूझ रहा है, वहीं अब सरकार के प्रतिनिधि भी नाराज़ दिखाई दे रहे है. और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते नजर आ रहे हैं। ताजा मामला प्रदेश के उधम सिंह नगर जिले के बाजपुर से सामने आया है, जहां बाढ़ और जलभराव की समस्या से जूझ रहे लोगों के बीच सरकार के प्रतिनिधि संबंधित अधिकारी की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते नजर आए। मामला इतना बढ़ गया कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारी के बीच विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई और प्रतिनिधियों द्वारा अधिकारी के साथ मारपीट करने तथा उनके चेहरे पर कीचड़ पोतने का मामला सामने आया है। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस घटना के बाद विपक्ष ने भी प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। विपक्ष का आरोप है, कि सरकार अपने कार्यों और उपलब्धियों का खूब प्रचार करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति कुछ और ही नजर आती है। विपक्ष ने इस घटना को अधिकारियों की कथित लापरवाही से जोड़ते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। जिसके चलते आपसी बयानबाज़ी चरम पर देखने को मिल रही है।

प्रदेशभर में मानसून के चलते आमजन जीवन अस्त व्यस्त नज़र आ रहा है। पर्वतीय राज्य होने के कारण मानसून हमेशा चुनौतीपूर्ण दिखाई पड़ता है। पहाड़ो में भूसख्लन तो मैदानो में जलभराव काफी दिक्क़ते पैदा कर रहा है। साथ ही धामी सरकार ने अधकारियों को प्रदेश भर में 15 सितम्बर तक गड्डा मुक्त करने के आदेश दिए.वही अब सरकार के ही पूर्व दर्जाधारी मंत्री भी अधिकारियों के कामो को लेकर संतुष्ट नज़र नही आ रहे है। हालही का सम्बन्धित एक प्रकरण प्रदेश के उधम सिंह नगर के बाजपुर में घटित होते ही सियासी गलिआरो में हलचल मच गई है। दरअसल, लगातार हो रही बारिश के चलते बाजपुर में रेबड़ा नदी पर बन रहे पुल की वजह से बाढ़ जैसे हालात उत्पन्न होते ही लोगों के घरों में पानी घुस आया, आरोप यह है कि पुल का काम धीमी गति के चलते बाढ़ से जुझना पड़ रहा है। इस सबको लेकर गुस्साए भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य व पूर्व दर्जा मंत्री राजेश कुमार और उनके समर्थकों का गुस्सा लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों पर फूट पड़ा, इस बीच मौके पर मौजूद जेई राजीव गौड़ के चेहरे पर कीचड़ पोती गई और मारपीट भी की गई। घटना के बाद लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों ने डीएम को ज्ञापन सौप कार्यवाही की मांग की है। वही यह विषय राजनितिक गलिआरो में भी चर्चा का विषय बन गया है, जिसके चलते विपक्ष अधिकारियों की लापरवाही व सरकार के दावो हवाहवाई बताता नज़र आ रहा है। तो वही सत्ता पक्ष अपनी सफाई ज़ाहिर कर रहा है।

बहरहाल, बाजपुर की घटना ने मानसून के दौरान प्रशासनिक तैयारियों की पोल खोल दी है। एक तरफ प्रदेश की जनता बारिश, जलभराव और भूस्खलन से जूझ रही है तो दूसरी तरफ जनप्रतिनिधि और अधिकारियों के बीच टकराव सामने आ रहा है। सवाल यह है कि जब अधिकारी और जनप्रतिनिधि ही एक दूसरे के आमने-सामने होंगे, तो आम जनता की समस्याओं का समाधान कैसे होगा। सरकार भले ही सड़क पुनर्निर्माण और अतिक्रमण हटाने के दावे कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत बाजपुर जैसी घटनाओं से उजागर हो रही है। वही विपक्ष को भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरने का मौका मिल गया है। अब देखना होगा कि सरकार इस मामले में क्या कार्रवाई करती है. और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि मानसून से निपटने के लिए प्रशासन कितना मुस्तैद रहता है, ताकि जनता को राहत मिल सके।

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